भारत–अमेरिका रक्षा सौदा: 100 जेवलिन मिसाइलें और 216 एक्सकैलिबर स्मार्ट गोले खरीदने की 92.8 मिलियन डॉलर की डील

भारत–अमेरिका रक्षा सौदा: 100 जेवलिन मिसाइलें और 216 एक्सकैलिबर स्मार्ट गोले खरीदने की 92.8 मिलियन डॉलर की डील

भारत–अमेरिका रक्षा सौदा: 100 जेवलिन मिसाइलें और 216 एक्सकैलिबर स्मार्ट गोले खरीदने की 92.8 मिलियन डॉलर की डील
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Nov 20, 2025, 2:19:00 PM

अमेरिका ने भारत को 100 एफजीएम–148 जेवलिन मिसाइल सिस्टम और 216 एम982A1 एक्सकैलिबर स्मार्ट तोपगोले बेचने की मंजूरी दे दी है। दोनों देशों के बीच लगभग 92.8 मिलियन डॉलर (करीब 775 करोड़ रुपए) की रक्षा खरीद समझौता हुआ है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) ने जानकारी दी कि हथियारों की बिक्री के लिए आवश्यक दस्तावेज और अनुमति संबंधी विवरण अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को भेज दिए गए हैं। एजेंसी ने कहा कि ये आधुनिक हथियार भारत को वर्तमान और भावी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता प्रदान करेंगे।

FGM-148 जेवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल है। इसे टैंक, आर्मर्ड व्हीकल और बंकर जैसे लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। यह मिसाइल टारगेट की हीट सिग्नेचर पकड़कर उस पर वार करती है। इसकी मारक दूरी करीब 2.5 किलोमीटर है और धुआं, धूल या खराब मौसम में भी यह सटीक निशाना लगा सकती है।

एक्सकैलिबर: तोप से दागा जाने वाला ‘स्मार्ट’ गोला

M982A1 एक्सकैलिबर एक GPS-गाइडेड स्मार्ट प्रोजेक्टाइल है। यह साधारण तोपगोले की तरह छोड़ा जाता है, लेकिन काम हाई-प्रिसिजन बम जैसा करता है। जहां सामान्य तोपें 15–20 किमी रेंज तक असरदार होती हैं, वहीं एक्सकैलिबर 40 से 50 किलोमीटर दूर के लक्ष्य पर सटीक प्रहार कर सकता है।

भारत को हथियार दो पैकेज में मिलेंगे

पहला पैकेज: जेवलिन मिसाइलें — लागत: 45.7 मिलियन डॉलर

  • 100 FGM-148 जेवलिन मिसाइल

  • 25 कमांड लॉन्च यूनिट (लाइटवेट)

  • प्रशिक्षण के लिए सिम्युलेटर राउंड

  • बैटरी कूलेंट यूनिट व ट्रेनिंग मैनुअल

  • जरूरी स्पेयर पार्ट्स और टूल किट

  • तकनीकी सहायता और ट्रेनिंग सुविधा

दूसरा पैकेज: एक्सकैलिबर स्मार्ट प्रोजेक्टाइल — लागत: 47.1 मिलियन डॉलर

  • 216 M982A1 एक्सकैलिबर स्मार्ट गोला

  • PEFCS फायर कंट्रोल सिस्टम

  • प्राइमर और प्रोपेलेंट चार्ज

  • तकनीकी सहायता और मरम्मत सेवा

DSCA का बयान: भारत की सुरक्षा और मजबूत होगी

DSCA के अनुसार, यह सौदा अमेरिका और भारत के बीच रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा। आधुनिक हथियार भारत की होमलैंड सिक्योरिटी, सामरिक क्षमता और क्षेत्रीय खतरों को रोकने की शक्ति बढ़ाएंगे।

एजेंसी ने कहा कि इन हथियारों को भारतीय सेनाओं में शामिल करना आसान होगा और इससे दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य संतुलन प्रभावित नहीं होगा। साथ ही यह खरीद अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर भी कोई नकारात्मक असर नहीं डालेगी।