यूके में झारखण्ड की प्राचीन विरासत पर वैश्विक मंथन, मेगालिथ संरक्षण को लेकर बनेगा अंतरराष्ट्रीय रोडमैप

यूके में झारखण्ड की प्राचीन विरासत पर वैश्विक मंथन, मेगालिथ संरक्षण को लेकर बनेगा अंतरराष्ट्रीय रोडमैप

यूके में झारखण्ड की प्राचीन विरासत पर वैश्विक मंथन, मेगालिथ संरक्षण को लेकर बनेगा अंतरराष्ट्रीय रोडमैप
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 21, 2026, 4:28:00 PM

झारखण्ड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में राज्य का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर रहा, जहां उसने विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों और विशेषज्ञ समूहों के साथ अहम बैठकें कीं। इन बैठकों का केंद्रीय विषय झारखण्ड की प्राचीन मेगालिथ और मोनोलिथिक विरासत का संरक्षण, पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक प्रबंधन और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की संभावनाएं रहीं।

बैठकों में राज्य में मौजूद मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण, विस्तृत दस्तावेजीकरण, संरचनात्मक सुरक्षा, परिदृश्य प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जैसे पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी परंपराओं से गहराई से जुड़ी इन ऐतिहासिक संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए एक मजबूत, तकनीकी रूप से विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रस्तुति तैयार की जाए।

इस अंतरराष्ट्रीय संवाद के दौरान पुरातत्व, विरासत संरक्षण, इंजीनियरिंग और परामर्श के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक संस्थानों के अनुभवों से सीखने और झारखण्ड में संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के संभावित सहयोग क्षेत्रों की पहचान की गई। राज्य सरकार इन विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर एक स्पष्ट और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करेगी, जिससे मेगालिथिक विरासत का संरक्षण संरचनात्मक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तीनों स्तरों पर सुदृढ़ किया जा सके।

इस अवसर पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड सरकार अपनी बहुमूल्य मेगालिथिक और मोनोलिथिक विरासत के संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस धरोहर को केवल पुरातात्विक अवशेष नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक पहचान के रूप में देखती है। इसी सोच के तहत वैज्ञानिक तरीकों, समुदाय की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए दीर्घकालिक और प्रभावी प्रयास किए जाएंगे, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

यूके दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने Museum of London Archaeology (MOLA), University College London, Wardell Armstrong / SLR Consulting, Simpson & Brown, AECOM, Wessex Archaeology और Arup जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से संवाद किया। इन बैठकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुरातत्वविदों, संरक्षण विशेषज्ञों और वरिष्ठ परामर्शदाताओं ने अपने अनुभव साझा किए, जो झारखण्ड की प्राचीन धरोहर को वैश्विक मंच तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।