नई दिल्ली में मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुख्यालय के बाहर सामान्य वर्ग के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने नए भेदभाव-रोधी दिशानिर्देशों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूजीसी के हालिया नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव को बढ़ावा देंगे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिशानिर्देशों में शिकायत दर्ज होते ही कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है, जबकि आरोपों की निष्पक्ष जांच, पर्याप्त सबूत और आरोपी को सुनवाई का पूरा मौका देने की व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों के परिसर में डर का माहौल बन सकता है और शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
कई शिक्षकों ने यह भी चिंता जताई कि इन नियमों के लागू होने के बाद सामान्य शैक्षणिक गतिविधियाँ जैसे मूल्यांकन, शोध मार्गदर्शन और अकादमिक बहस भी शिकायतों के दायरे में आ सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप शिक्षक और छात्र खुलकर संवाद करने से कतराएंगे।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने तख्तियों और बैनरों पर “न्याय चाहिए, डर नहीं”, “समान कानून, समान अधिकार” और “पहचान नहीं, प्रमाण के आधार पर न्याय” जैसे नारे लिखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसी नीतियों के खिलाफ हैं जो जन्म के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष मानती हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी से आग्रह किया कि दिशानिर्देशों की समीक्षा की जाए, स्पष्ट परिभाषाएँ जोड़ी जाएँ और झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से बचाव के लिए सुरक्षा प्रावधान लागू किए जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो यह आंदोलन देश भर के विश्वविद्यालयों में फैलाया जाएगा।
यूजीसी की ओर से इस विरोध प्रदर्शन पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।