झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष सह विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ स्विट्ज़रलैंड के दावोस दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य झारखंड में विदेशी पूंजी निवेश की संभावनाओं को तलाशना और राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करना है।
20 जनवरी को दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भाग लेकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। वे इस मंच पर शामिल होने वाले भारत के पहले आदिवासी नेता बने। झारखंड में उनके नेतृत्व में हो रहे परिवर्तनकारी प्रयासों को मान्यता देते हुए उन्हें ‘व्हाइट बैज’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और उसके नागरिकों का सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने लिखा कि वे अपने पुरखों और ‘बाबा दिशोम गुरुजी’ के सपनों को साकार करने के संकल्प के साथ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल हुए हैं। दावोस यात्रा का मुख्य लक्ष्य युवा झारखंड को आगे बढ़ाना और राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड की प्रगति से राज्य के लोग भी समान रूप से सशक्त होंगे।
दावोस में चल रहे वैश्विक सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कई अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत के नेताओं से मुलाकात की है। टाटा स्टील, हिताची, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, इंफोसिस, वेलस्पन, एबी इनबेव, ब्लूमबर्ग, टेक महिंद्रा, अल्फानार, रामकी ग्रुप और एवरस्टोन ग्रुप सहित स्वीडन, अमेरिका और यूरोप की प्रमुख व्यापार परिषदों व संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ झारखंड में निवेश को लेकर व्यापक चर्चा हुई है।
इन बैठकों में टिकाऊ उद्योगों, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन, आधुनिक आधारभूत संरचना, डिजिटल तकनीक और जलवायु-संवेदनशील औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों की ओर से झारखंड को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कई और वैश्विक नेताओं के साथ सार्थक संवाद प्रस्तावित हैं।
दावोस से मिल रहे इन संकेतों के साथ झारखंड में निवेश के नए द्वार खुलते दिखाई दे रहे हैं, जो आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को नई दिशा दे सकते हैं।