सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली अस्थायी अग्रिम जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह राहत उन्हें असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए दी गई थी, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा की शिकायत से जुड़ा है।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को अंतरिम रूप से स्थगित कर दिया। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार का पक्ष रखा और हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम में संबंधित अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उस पर फैसला लेते समय ट्रांजिट बेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की इस कार्यवाही का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी, खेड़ा के लिए स्थानीय अदालत में राहत पाने का रास्ता खुला रहेगा।
गौरतलब है कि खेड़ा ने 7 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी की आशंका जताई थी और हैदराबाद का पता प्रस्तुत किया था। इसके बाद 10 अप्रैल को हाई कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की सक्षम अदालत में जाकर नियमित राहत के लिए आवेदन कर सकें।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी का वास्तविक खतरा है। इसी आधार पर सीमित अवधि के लिए उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई थी।
इस राहत के साथ कई शर्तें भी जोड़ी गई थीं, जिनमें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करना, जांच में सहयोग देना, जांच अधिकारी के समक्ष आवश्यकतानुसार उपस्थित होना और बिना अनुमति देश से बाहर न जाना शामिल था। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि वे तय समय सीमा के भीतर असम की अदालत का रुख करें और मामले से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से बचें।
यह पूरा विवाद 5 अप्रैल को खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट और विदेशों में संपत्तियां हैं, जिनका उल्लेख चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इसी आरोप के आधार पर असम में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।