सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अपनी सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी कम करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेचने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत SECL में 35 प्रतिशत तक हिस्सेदारी घटाई जा सकती है।
इसी क्रम में, बोर्ड ने महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) में भी हिस्सेदारी बिक्री को मंजूरी प्रदान की है। कंपनी MCL में लगभग 25 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। यह निर्णय हाल ही में आयोजित बोर्ड बैठक में लिया गया।
जानकारी के अनुसार, SECL में हिस्सेदारी बिक्री के लिए ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसके तहत कोल इंडिया अपने मौजूदा शेयरों को बाजार में बेचेगी। इसके अलावा, कंपनी ने नई इक्विटी जारी करने का भी विकल्प खुला रखा है, जिसके जरिए अधिकतम 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शेयर विभिन्न चरणों में जारी किए जा सकते हैं। इसके लिए आईपीओ या अन्य स्वीकृत तरीकों का उपयोग किया जाएगा।
MCL के मामले में भी कंपनी ने इसी तरह की रणनीति अपनाने की योजना बनाई है। यहां भी शेयरों की बिक्री घरेलू पूंजी बाजार में आईपीओ या अन्य अनुमोदित माध्यमों से की जाएगी, जिसमें OFS प्रमुख तरीका होगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में कोल इंडिया पहले ही कदम बढ़ा चुका है। दिसंबर 2025 में बोर्ड ने एक सर्कुलर प्रस्ताव के जरिए SECL और MCL की लिस्टिंग के लिए प्रारंभिक स्वीकृति दे दी थी।
इस ताजा निर्णय के साथ, कोल इंडिया अपनी सहायक इकाइयों में निवेश संरचना को पुनर्गठित करने और पूंजी बाजार के जरिए संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।