भारतीय विज्ञान को नई उड़ान! BHU के स्वदेशी आविष्कार को मिला पेटेंट

भारतीय विज्ञान को नई उड़ान! BHU के स्वदेशी आविष्कार को मिला पेटेंट

भारतीय विज्ञान को नई उड़ान! BHU के स्वदेशी आविष्कार को मिला पेटेंट
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 26, 2026, 12:44:00 PM

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक स्वदेशी और किफायती शोध उपकरण को भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपकरण छोटे प्रयोगात्मक पशुओं पर विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है और शोधकर्ताओं को एक ही मंच पर कई नियंत्रित परिस्थितियों में प्रयोग करने की सुविधा देगा।

"A Low Cost and Portable Small Animals Device for Simulation of Differing Environmental Condition" नामक इस तकनीक का विकास बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग में किया गया। इसे डॉ. अनिल कुमार यादव ने अपने पीएचडी शोध के दौरान डॉ. कुमार सर्वोत्तम के मार्गदर्शन में तैयार किया।

यह पोर्टेबल डिवाइस वैज्ञानिकों को छोटे प्रयोगात्मक पशुओं के लिए कृत्रिम रूप से अलग-अलग पर्यावरणीय स्थितियां निर्मित करने में सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से ऑक्सीजन का स्तर, वायुदाब, तापमान, आर्द्रता, वायु की गुणवत्ता और प्रकाश जैसी कई परिस्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे यह समझने में आसानी होगी कि बदलते पर्यावरण का जीवों की शारीरिक क्रियाओं और व्यवहार पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक उपलब्ध अधिकांश उपकरण या तो अत्यधिक महंगे थे या फिर एक समय में सीमित पर्यावरणीय कारकों का ही परीक्षण कर सकते थे। इसके विपरीत, बीएचयू का यह स्वदेशी उपकरण कम लागत में एक साथ कई पर्यावरणीय मानकों का अध्ययन करने की सुविधा उपलब्ध कराता है, जिससे सीमित संसाधनों वाले शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को भी आधुनिक शोध तकनीक का लाभ मिल सकेगा।

इस उपकरण के संभावित उपयोग का दायरा भी काफी व्यापक है। इसका इस्तेमाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन की स्थिति, वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, श्वसन रोगों, अंतरिक्ष एवं विमानन चिकित्सा सहित विभिन्न जैव-चिकित्सकीय अनुसंधानों में किया जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह नई दवाओं के परीक्षण और मानव स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण शोध कार्यों में भी उपयोगी साबित होगा।

बीएचयू को इस नवाचार के लिए मिला भारतीय पेटेंट विश्वविद्यालय में विकसित हो रही स्वदेशी तकनीकों और अनुसंधान क्षमता की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता देश में कम लागत वाली वैज्ञानिक तकनीकों के विकास और आत्मनिर्भर अनुसंधान को भी नई दिशा देने वाली है।