भांगर विस्फोट मामले में NIA की कार्रवाई तेज, TMC नेता साओकत मोल्ला की तलाश में कई ठिकानों पर छापेमारी
भांगर विस्फोट मामले में NIA की कार्रवाई तेज, TMC नेता साओकत मोल्ला की तलाश में कई ठिकानों पर छापेमारी
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुई हिंसक घटनाओं और भांगर क्षेत्र में हुए विस्फोट प्रकरण की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक साओकत मोल्ला की तलाश में दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग और जिबनताला इलाके में व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में उनके आवास सहित कई संभावित ठिकानों की तलाशी ली गई।
सूत्रों के अनुसार, सुबह के समय एनआईए की अलग-अलग टीमों ने जिबनताला स्थित मोल्ला के निवास पर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने उनके वर्तमान ठिकाने और हालिया गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया। परिवार की ओर से बताया गया कि साओकत मोल्ला घर पर मौजूद नहीं हैं। इसके बाद एजेंसी ने उनके एक पुत्र को पूछताछ के लिए अपने साथ ले लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है और उससे केवल जांच के सिलसिले में जानकारी ली जा रही है।
जांच एजेंसी ने मोल्ला से जुड़े एक होटल तथा अन्य स्थानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। माना जा रहा है कि एजेंसी को हालिया जांच के दौरान कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर मोल्ला से पूछताछ आवश्यक समझी जा रही है। अधिकारियों को संदेह है कि वह फिलहाल कोलकाता या उसके आसपास के किसी इलाके में हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि 18 मार्च को भांगर के चल्ताबेरिया-बामुनिया क्षेत्र में हुए विस्फोट की जांच के दौरान साओकत मोल्ला का नाम सामने आया था। इसके अतिरिक्त चुनाव परिणामों के बाद विभिन्न इलाकों में हुई हिंसक घटनाओं के संबंध में भी उनका उल्लेख जांच के दायरे में आया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस लगातार यह कहती रही है कि उनके नेता पर लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि इससे पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) भी कथित कोयला तस्करी मामले में साओकत मोल्ला से कई बार पूछताछ कर चुका है। उस मामले में लंबी पूछताछ हुई थी, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। अब एनआईए की सक्रियता ने एक बार फिर उनके नाम को सुर्खियों में ला दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही जिबनताला क्षेत्र में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और जांच एजेंसी की गतिविधियों के कारण उत्सुक नागरिकों की भीड़ जुट गई थी। पूरे इलाके में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी रहा। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि विस्फोट और चुनाव बाद हुई हिंसा के मामलों में किसी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है या नहीं।
इस बीच, एनआईए जिस मामले की जांच कर रही है, उसका संबंध अप्रैल में बरामद किए गए बड़ी संख्या में संदिग्ध विस्फोटकों से भी जुड़ा है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर एजेंसी ने उस मामले को अपने हाथ में लिया था, जिसमें कोलकाता पुलिस ने 79 संदिग्ध देसी बम और विस्फोटक सामग्री जब्त की थी। यह मामला मूल रूप से 25 अप्रैल को उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था।
पुलिस को सूचना मिली थी कि दक्षिण 24 परगना जिले के माझेरहाट (पोइलेपारा) गांव में एक कब्रिस्तान के समीप स्थित खाली मकान में विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी गई है। इसके बाद की गई छापेमारी में जूट की रस्सियों से बंधी गोलाकार वस्तुएं और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी, जिन्हें प्रारंभिक तौर पर देसी बम माना गया।
गृह मंत्रालय का मानना है कि विस्फोटकों का अवैध भंडारण और उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से मामले को राष्ट्रीय महत्व और संभावित बड़ी साजिश के दृष्टिकोण से देखते हुए एनआईए को जांच सौंपी गई। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क, इसके संभावित संचालकों और किसी व्यापक षड्यंत्र की संभावना की जांच कर रही है।
फिलहाल एनआईए की ओर से साओकत मोल्ला के खिलाफ चल रही कार्रवाई या तलाशी अभियान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि जांच एजेंसी की गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।