मानवता-विरोधी अपराधों में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ट्रिब्यूनल ने सुनाई मौ*त की सज़ा

मानवता-विरोधी अपराधों में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ट्रिब्यूनल ने सुनाई मौ*त की सज़ा

मानवता-विरोधी अपराधों में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ट्रिब्यूनल ने सुनाई मौ*त की सज़ा
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Nov 17, 2025, 3:09:00 PM

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ किए गए गंभीर अपराधों का दोषी मानते हुए इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने फांसी की सज़ा सुनाई है। जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ—जिसमें जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक इनाम चौधरी शामिल थे—ने लगभग 400 पन्नों का निर्णय जारी किया। फैसला छह भागों में प्रस्तुत किया गया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उसने मानवाधिकार समूहों व अन्य संस्थाओं की रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत अध्ययन कर अपना निष्कर्ष निकाला है।

ट्रिब्यूनल के अनुसार प्रदर्शनकारियों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने का आदेश

निर्णय में बताया गया कि बांग्लादेश में हुए प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। ट्रिब्यूनल के मुताबिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बमबारी का आदेश स्वयं शेख हसीना ने दिया था। इसके अलावा अवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर सड़क पर संगठित हिंसा करने का आरोप भी लगाया गया। सुनवाई के दौरान हसीना और उनके सहयोगी मंत्री हसनुल हक इनु के बीच फोन कॉल का विवरण भी सुनाया गया, जिसे हिंसा में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका का संकेत माना गया।

1400 से अधिक लोगों की मौत, हजारों गिरफ्तार — ट्रिब्यूनल का दावा

ट्रिब्यूनल के मुताबिक अधिकांश छात्रों की मौत सुरक्षा बलों द्वारा धातु के छर्रों वाली गोलियों से हुई। निर्णय में कहा गया कि शेख हसीना के निर्देश पर सेना, पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने कानून की प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं, जो एक बड़ी साज़िश का हिस्सा प्रतीत होती हैं। ट्रिब्यूनल का अनुमान है कि इस दौरान लगभग 1400 लोगों की मौत हुई जबकि 11,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया।

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि उनके पास हसीना के खिलाफ कई प्रकार के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि यह संस्था “इंटरनेशनल” नाम से जानी जाती है, लेकिन इसकी कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता या वैश्विक कानूनी पहचान नहीं है।