अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा है कि दुनिया तेजी से ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां किसी देश की वैश्विक स्थिति केवल आर्थिक आकार से नहीं, बल्कि उसकी ऊर्जा क्षमता, डिजिटल ढांचे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर नियंत्रण से तय होगी। उनका मानना है कि भारत को तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि अपने “इंटेलिजेंस इकोसिस्टम” का स्वामी बनना होगा।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की वार्षिक बिजनेस समिट 2026 को संबोधित करते हुए अदाणी ने बदलते वैश्विक समीकरणों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में जिस वैश्वीकरण मॉडल ने दुनिया को जोड़ा था, अब उसकी जगह रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ले रही है। उनके अनुसार, आज तकनीक और डेटा महज कारोबारी साधन नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति के अहम हिस्से बन चुके हैं।
अदाणी ने कहा कि सेमीकंडक्टर, क्लाउड नेटवर्क और डेटा प्रोसेसिंग जैसी तकनीकें अब भू-राजनीतिक प्रभाव का आधार बन रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी देश का डेटा और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बाहरी नियंत्रण में होगा, तो भविष्य की दिशा भी वही ताकतें तय करेंगी।
उन्होंने ऊर्जा और डिजिटल क्षमता को आधुनिक राष्ट्रों की दो सबसे महत्वपूर्ण जरूरतें बताया। अदाणी के मुताबिक, जो देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखेंगे, वही औद्योगिक विकास में आगे रहेंगे, जबकि कंप्यूटिंग संसाधनों पर पकड़ रखने वाले देश आने वाले “इंटेलिजेंस युग” का नेतृत्व करेंगे।
एआई पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसे केवल एक सॉफ्टवेयर तकनीक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, एआई के पीछे विशाल ऊर्जा नेटवर्क, डेटा सेंटर, चिप निर्माण, कंप्यूटिंग क्षमता, टेलेंट और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी कई परतें काम करती हैं। इसलिए किसी भी देश के लिए इस पूरे इकोसिस्टम में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है।
भारत की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि देश के पास मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, मोबिलिटी और डिजिटल सेवाओं में पहले से मजबूत मांग मौजूद है, जो उसे वैश्विक तकनीकी बदलाव का लाभ उठाने का अवसर देती है। उन्होंने बताया कि भारत 500 गीगावॉट से अधिक स्थापित बिजली क्षमता हासिल कर चुका है और आने वाले समय में एआई आधारित अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा और डिजिटल निवेश की जरूरत होगी।
रोजगार पर एआई के प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। अदाणी ने कहा कि तकनीक को नौकरी खत्म करने वाले खतरे के रूप में नहीं, बल्कि नए अवसरों के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भारत ऐसा एआई मॉडल विकसित कर सकता है जो उत्पादकता बढ़ाने के साथ छोटे कारोबारियों और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए।
अपने समूह की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अदाणी समूह ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में 100 अरब डॉलर के निवेश की दिशा में काम कर रहा है। इसमें गुजरात के खावड़ा में विकसित हो रहा 30 गीगावॉट क्षमता वाला विशाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट शामिल है। इसके अलावा, भारत में स्वदेशी कंप्यूटिंग ढांचा तैयार करने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी भी की जा रही है।
अपने संबोधन के दौरान अदाणी ने व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जहां संभावनाएं बेहद सीमित दिखती थीं, लेकिन भविष्य उन्हीं के पक्ष में जाता है जो उसे बनाने का साहस रखते हैं।
भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले समय की सबसे बड़ी लड़ाई सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा ग्रिड, डेटा सेंटर, प्रयोगशालाओं, फैक्ट्रियों और शिक्षा संस्थानों में लड़ी जाएगी। उनके अनुसार, आधुनिक दौर में वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ है ऊर्जा, तकनीक और ज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना।