ईरान की नौसेना के युद्धपोत IRIS लवन से जुड़े करीब 90 नाविक केरल के कोच्चि से अपने देश के लिए रवाना हो गए हैं। जहाज में तकनीकी समस्या आने के बाद उसे कोच्चि पोर्ट पर आपातकालीन तौर पर लंगर डालना पड़ा था। रक्षा सूत्रों के अनुसार यह दल शुक्रवार रात को विशेष व्यवस्था के तहत रवाना हुआ, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि जहाज पर मौजूद बाकी क्रू सदस्यों की वापसी या जहाज की स्थिति से संबंधित अन्य विवरण फिलहाल साझा नहीं किए जा सकते।
बताया गया है कि IRIS लवन में उस समय तकनीकी दिक्कत आई थी जब वह हिंद महासागर के उस क्षेत्र में मौजूद था, जहां श्रीलंका के दक्षिण में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक अन्य ईरानी युद्धपोत IRIS देना को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। इस स्थिति के बीच 28 फरवरी को ईरान की सरकार ने भारत से तत्काल सहायता की मांग की थी ताकि जहाज की तकनीकी खराबी को ठीक किया जा सके।
भारत सरकार ने इस अनुरोध पर तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए 1 मार्च को कोच्चि में जहाज को डॉक करने की अनुमति दे दी। समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। इसके बाद 4 मार्च को यह युद्धपोत सुरक्षित रूप से कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया।
जहाज पर मौजूद कुल 183 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनके रहने व देखभाल की व्यवस्था भारतीय नौसेना की निगरानी में विशेष सुविधाओं में की गई। इस दौरान उन्हें चिकित्सकीय सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
सूत्रों के अनुसार, जहाज में आई तकनीकी समस्या को ठीक करने का काम अभी जारी है। साथ ही बचे हुए 90 से अधिक क्रू मेंबर्स की स्वदेश वापसी को लेकर फैसला आने वाले दिनों में लिया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा कारणों से जहाज के चालक दल को फिलहाल नेवल बेस से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तनावपूर्ण क्षेत्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत द्वारा ईरानी युद्धपोत को दी गई यह आपात सहायता अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग और मानवीय जिम्मेदारी के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।