पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर प्रखंड के कुंदुबेड़ा गांव में प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस ने माहौल गर्मा दिया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव से ग्रामीण बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि जहां वे वर्षों से विद्यालय बनाने की मांग करते आ रहे हैं, वहीं प्रशासन ने उनकी ज़रूरतों को दरकिनार कर कचरा प्लांट का नोटिस भेज दिया, जो उन्हें पूरी तरह अस्वीकार्य है।
ग्रामीण सुनील पूर्ति के अनुसार, बच्चों की शिक्षा के लिए गांव में स्कूल का निर्माण बेहद जरूरी है। ग्रामीण कई बार इस विषय को प्रशासन के सामने रख चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट जिला प्रशासन के निर्देश पर सीओ कार्यालय से उन्हें नोटिस मिला है, जिसमें नगर विकास एवं आवास विभाग की ठोस कचरा प्रबंधन योजना के लिए लगभग तीन एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस सूचना से ग्रामीणों में रोष और चिंता दोनों बढ़ गई है।
गुरुवार को बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा एकत्रित होकर कचरा प्लांट का विरोध करने सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां लिए लोग नारेबाज़ी करते रहे और साफ कहा कि किसी भी हालत में गांव में कचरा प्रबंधन केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। ग्रामीणों को भय है कि प्लांट से प्रदूषण फैलेगा, बीमारियां बढ़ेंगी और पर्यावरण को नुकसान होगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मूल आवश्यकताओं—जैसे शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र और पेयजल—को नजरअंदाज कर रहा है। उनका कहना है कि अभी भी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, ऐसे में कचरा प्लांट जैसी परियोजना गांव की समस्याओं को और बढ़ा देगी। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी सहमति के बिना इस योजना को आगे बढ़ाना स्वीकार नहीं होगा।
फिलहाल विरोध जारी है और ग्रामीण जिला प्रशासन से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। प्रशासन की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।