साहिबगंज में ईडी की बड़ी कार्रवाई; रिश्वत, फर्जी इनवॉइस और अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क उजागर

साहिबगंज में ईडी की बड़ी कार्रवाई; रिश्वत, फर्जी इनवॉइस और अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क उजागर

साहिबगंज में ईडी की बड़ी कार्रवाई; रिश्वत, फर्जी इनवॉइस और अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क उजागर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 31, 2026, 10:53:00 AM

झारखंड के साहिबगंज जिले में कथित अवैध पत्थर खनन और खनिजों के गैरकानूनी परिवहन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए छह आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह मामला बड़े पैमाने पर खनिज संसाधनों के अवैध दोहन और राजस्व हानि से संबंधित है।

ईडी के रांची जोनल कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत यह शिकायत रांची स्थित विशेष न्यायालय में प्रस्तुत की गई है। इस मामले में एम/एस सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उससे जुड़े निदेशकों समेत कुल छह व्यक्तियों/संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने करीब 5.39 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय को जब्त करने की भी मांग की है।

इस मामले की जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हुई थी। सीबीआई ने बिहार के भागलपुर स्थित पिरपैंती रेलवे साइडिंग से जुड़े मामलों में अज्ञात रेलवे अधिकारियों और एक निजी कंपनी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। बाद में इस जांच में बिहार और झारखंड के अलग-अलग थानों में दर्ज तीन अन्य एफआईआर को भी शामिल किया गया।

अवैध खनन और परिवहन का नेटवर्क

ईडी की जांच में सामने आया कि संबंधित कंपनी और उसके निदेशक वर्ष 2015 से साहिबगंज के जोकमारी क्षेत्र में अवैध रूप से पत्थर खनन और परिवहन में संलिप्त थे। आरोप है कि बिना जरूरी चालान के ही रेलवे के माध्यम से 251 रैक पत्थर भेजे गए। इस प्रक्रिया से सरकार को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हुआ, जिसमें पत्थर चिप्स और बोल्डर दोनों शामिल हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस अवैध गतिविधि को अंजाम देने के लिए संबंधित पक्षों ने कथित रूप से रेलवे अधिकारियों और अन्य लोक सेवकों को रिश्वत दी। इसके बाद अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों के जरिए लेन-देन किया गया। दो कथित शेल कंपनियों के माध्यम से करीब 4.87 करोड़ रुपये का लेनदेन दिखाया गया, ताकि धन के स्रोत को छुपाया जा सके।

जांच के दौरान ईडी ने अक्टूबर 2024 में साहिबगंज स्थित कंपनी के परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और रिकॉर्ड जब्त किए गए। बाद में इन जब्त सामग्रियों को रखने की अनुमति पीएमएलए न्यायाधिकरण द्वारा भी दी गई।

ईडी ने मामले से जुड़े निदेशकों, रेलवे अधिकारियों और जिला खनन विभाग के अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।