उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर, बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर, बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने अपनी रफ्तार बनाए रखते हुए पूर्वोत्तर भारत के शेष हिस्सों के साथ-साथ पूरे सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त क्षेत्रों को कवर कर लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 15 जून तक लगातार वर्षा का दौर बना रहेगा। विशेष रूप से असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में 14 जून तक अत्यधिक वर्षा दर्ज होने की संभावना है। वहीं नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के लिए 13 जून तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
11 और 12 जून के दौरान एक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वर्षा की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज आंधी, बिजली चमकने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की स्थिति बन सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में हवाओं की गति 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
पूर्वी भारत में बढ़ेगी वर्षा गतिविधि
बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 10 से 13 जून के बीच मौसम अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए 10 जून को अत्यधिक वर्षा का विशेष अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ओडिशा में 11 से 13 जून के बीच कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
आईएमडी के अनुसार बिहार के विभिन्न जिलों में 10 जून तथा 12 से 15 जून के बीच बारिश होने की संभावना है। 10 से 12 जून के दौरान कुछ स्थानों पर भारी वर्षा के साथ तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
इसके बाद 13 से 15 जून तक भी गरज-चमक के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। 11 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा दर्ज होने की संभावना व्यक्त की गई है।
दक्षिण भारत में जारी रहेगा बारिश का सिलसिला
दक्षिणी राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में अगले कई दिनों तक बारिश का क्रम जारी रह सकता है। केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की संभावना जताई गई है।
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कई जिलों को 10 से 13 जून के बीच भारी बारिश के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।
पश्चिमी भारत में भी बारिश के संकेत
कोंकण और गोवा क्षेत्र में 10 और 11 जून को तेज वर्षा की संभावना है। इसके अलावा महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत में 11 जून तक अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। हालांकि 12 और 13 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है। पूर्वी भारत में भी 11 से 13 जून के बीच तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की जा सकती है।
बारिश और आंधी की संभावना के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 10 और 11 जून तक गर्म हवाओं का प्रभाव बने रहने की आशंका है।
मौसम विभाग ने बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोगों को आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों को फसल कटाई और भंडारण के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है। समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों और मछुआरों को भी मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।]
आईएमडी के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के शेष भागों तथा बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में भी मॉनसून के विस्तार के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।