उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड में न्यायिक प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड में न्यायिक प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं से जुड़े मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को अदालत में सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने गौरव कुमार, मोनू कुमार और सोनू शर्मा की याचिकाओं पर अंतिम निर्णय फिलहाल सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 30 जून तय की है। वहीं, आरोपी सुंदर साव की अग्रिम जमानत याचिका पर 4 जुलाई को सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच कर रहे अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) को केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
इस बहुचर्चित मामले में कथित मास्टरमाइंड अतुल वत्स समेत विकास कुमार, आशीष कुमार, योगेश कुमार, मुकेश कुमार और बिहार से गिरफ्तार गिरोह के अन्य सदस्यों सहित कुल आठ आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इनके अतिरिक्त पांच अभ्यर्थी भी जेल में बंद हैं। इन सभी की जमानत याचिकाओं पर अलग-अलग तिथियों में सुनवाई होनी बाकी है।
ऐसे सामने आया मामला
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा 13 अप्रैल को आयोजित होनी थी। आरोप है कि परीक्षा से एक दिन पहले, 12 अप्रैल की रात अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों के उत्तर याद करवाए जा रहे थे। इस सूचना के आधार पर तमाड़ थाना पुलिस ने रड़गांव स्थित एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज परिसर में छापेमारी की थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 166 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें कथित सरगना, पांच मास्टरमाइंड, सात महिलाएं और 152 अभ्यर्थी शामिल थे। बाद में गिरफ्तार लोगों की ओर से 83 जमानत याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें से 78 को अदालत से राहत मिल चुकी है।
जांच में सामने आया संगठित नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार, भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के लिए एक संगठित गिरोह सक्रिय था। आरोप है कि उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले उत्तर याद करवाने की व्यवस्था की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि अभ्यर्थियों से पहले चरण में तीन लाख रुपये और नौकरी मिलने के बाद दस लाख रुपये लेने की योजना बनाई गई थी।
बताया जाता है कि इलाके के ग्रामीणों को गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इसी सूचना के आधार पर हुई छापेमारी में कथित भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू हुई।