विधानसभा में जल संसाधन बजट पर हंगामा, अधूरी योजनाओं को लेकर विपक्ष हमलावर

विधानसभा में जल संसाधन बजट पर हंगामा, अधूरी योजनाओं को लेकर विपक्ष हमलावर

विधानसभा में जल संसाधन बजट पर हंगामा, अधूरी योजनाओं को लेकर विपक्ष हमलावर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 12, 2026, 4:58:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन जल संसाधन विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर बहस हुई। जल संसाधन मंत्री हफीजुल अंसारी ने विभाग की योजनाओं और चुनौतियों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी सरकार या विभाग की ताकत उसके काम से दिखनी चाहिए, केवल भाषणों से नहीं। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को यह भी संदेश दिया कि योजनाओं को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार मेहनत जरूरी है।

मंत्री ने केंद्र सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले कई परियोजनाओं में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता देती थी और राज्य को केवल 10 प्रतिशत खर्च उठाना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है और केंद्र की हिस्सेदारी घटकर करीब 19 प्रतिशत रह गई है, जबकि शेष 81 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार को वहन करना पड़ रहा है। उनके अनुसार इससे बड़ी परियोजनाओं को पूरा करना राज्य के लिए कठिन हो गया है।

विधानसभा में चर्चा के दौरान पलाही डैम का मुद्दा भी उठा। भाजपा विधायक सत्येंद्र तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री अंसारी ने कहा कि अगले पांच वर्षों के भीतर पलाही डैम को खोजकर उसे क्रियाशील स्थिति में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जो काम दशकों से अधूरा पड़ा है, उसे इस अवधि में पूरा करने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पीरडांड मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के तहत 130 तालाबों में पानी का भंडारण करने की योजना बनाई गई है।

उधर, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में अधूरी पड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तिसरी की चरकीपहाड़ी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि 2018 में शुरू हुई इस योजना की लागत 2.44 करोड़ रुपये है, जिसमें से 1.48 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

विधायक प्रदीप यादव ने भी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि राज्य में जल उपलब्धता का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल विधायकों पर जिम्मेदारी डाल देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जहां पानी की जरूरत है वहां ठोस योजना बनाकर काम करना होगा।

इस दौरान सरयू राय ने स्वर्णरेखा परियोजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक इस परियोजना से संबंधित मांग पत्र और ऑडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं भेजी गई है। उन्होंने बजट प्रस्तुति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बजट दस्तावेज में पिछले साल की भूमिका को लगभग उसी रूप में दोहरा दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि राज्य में मौजूद बांधों की संख्या और सिंचाई के लिए पानी के उपयोग का स्पष्ट विवरण दिया जाए।

चर्चा में विधायक मनोज यादव ने कहा कि राज्य में आजादी के इतने वर्षों बाद भी केवल करीब 40 प्रतिशत क्षेत्र को ही सिंचाई सुविधा मिल पाई है। उन्होंने स्वर्णरेखा परियोजना को अप्रभावी बताते हुए कहा कि पुनाशी जलाशय योजना भी अभी तक अधूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

वहीं विधायक जर्मादन पासवान ने कहा कि कई जगहों पर कच्चे बांधों में पानी मौजूद है, जबकि पक्के बांधों में पानी की कमी देखने को मिलती है। उन्होंने ऐसे बांधों की जांच कराने और टूटे हुए बांधों की मरम्मत कराने की मांग की।

जल संसाधन विभाग के बजट पर हुई इस चर्चा के दौरान राज्य में सिंचाई व्यवस्था, अधूरी परियोजनाओं और वित्तीय चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए।