मंईयां सम्मान योजना में ‘एंट्री बंद, एग्जिट चालू’; 11 महीनों में करीब डेढ़ लाख महिलाएं सूची से बाहर

मंईयां सम्मान योजना में ‘एंट्री बंद, एग्जिट चालू’; 11 महीनों में करीब डेढ़ लाख महिलाएं सूची से बाहर

मंईयां सम्मान योजना में ‘एंट्री बंद, एग्जिट चालू’; 11 महीनों में करीब डेढ़ लाख महिलाएं सूची से बाहर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 30, 2025, 1:11:00 PM

झारखंड की मंईयां सम्मान योजना इन दिनों एक गंभीर असंतुलन के दौर से गुजर रही है। योजना में नए लाभुकों को जोड़ने की प्रक्रिया लगभग पिछले 11 महीनों से ठप पड़ी है, जबकि पात्रता से बाहर होने का सिस्टम पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। स्थिति यह है कि जैसे ही किसी लाभार्थी महिला की उम्र 50 वर्ष पूरी होती है, उसका नाम पोर्टल से स्वतः हटा दिया जाता है, लेकिन 18 वर्ष की उम्र पार कर चुकी नई पात्र महिलाओं के लिए योजना के दरवाजे बंद नजर आ रहे हैं।

इसका सीधा असर यह हुआ है कि हर महीने हजारों महिलाओं के नाम लाभुक सूची से हटते जा रहे हैं, जबकि नए नाम जुड़ने की संख्या लगभग शून्य बनी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने न्यूनतम 8 हजार और अधिकतम 20 हजार तक महिलाओं को सिर्फ उम्र सीमा पूरी होने के कारण योजना से बाहर कर दिया जा रहा है। बीते 11 महीनों में इस वजह से कुल 1 लाख 33 हजार 776 महिलाओं के नाम पोर्टल से हट चुके हैं।

दूसरी ओर, राज्यभर में करीब ढाई लाख नए आवेदन लंबित पड़े हैं, जिन्हें अब तक योजना के पोर्टल पर शामिल नहीं किया गया है। स्थानीय अधिकारी जहां इसे तकनीकी खामी बता रहे हैं, वहीं जानकारों का मानना है कि नए लाभुकों को जोड़ने पर अनौपचारिक रोक लगा दी गई है।

नियमों के अनुसार, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं मंईयां सम्मान योजना के लिए पात्र हैं। लेकिन मौजूदा हालात में योजना से बाहर निकलने की प्रक्रिया ही अधिक प्रभावी दिखाई दे रही है। उल्लेखनीय है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। शुरुआत में लाभुक महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती थी, जिसे विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने 6 जनवरी 2025 को पहली बार बढ़ी हुई राशि जारी की थी। उस दिन 56 लाख 61 हजार 791 महिलाओं के खातों में 2500 रुपये की दर से कुल 1415 करोड़ 44 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। हालांकि, इसके बाद हुए सत्यापन में बड़ी संख्या में नाम सूची से हटते चले गए। जांच के दौरान 4 लाख 30 हजार लाभुकों को गलत या फर्जी पाए जाने पर बाहर किया गया, जबकि 50 वर्ष की उम्र सीमा पूरी होने के कारण 1.34 लाख महिलाओं के नाम काट दिए गए।

आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर 2024 में जहां 51.04 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिला था, वहीं नवंबर में यह संख्या घटकर 50.98 लाख रह गई। दिसंबर में लाभुकों की संख्या और कम होने की संभावना जताई जा रही है। अब तक कुल 5 लाख 63 हजार 791 नाम योजना से हट चुके हैं।

लगातार घटती लाभुक संख्या और नए आवेदनों की अनदेखी ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। योजना के भविष्य और पात्र महिलाओं तक इसके लाभ की निरंतरता को लेकर अब गंभीर मंथन की जरूरत महसूस की जा रही है।