विधानसभा में गरमाया जल संकट का मुद्दा, राज्य के 69 हजार से अधिक चापाकल खराब; हेमलाल मुर्मू ने उठाये सवाल

विधानसभा में गरमाया जल संकट का मुद्दा, राज्य के 69 हजार से अधिक चापाकल खराब; हेमलाल मुर्मू ने उठाये सवाल

विधानसभा में गरमाया जल संकट का मुद्दा, राज्य के 69 हजार से अधिक चापाकल खराब; हेमलाल मुर्मू ने उठाये सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 17, 2026, 1:02:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 16वें दिन ग्रामीण जलापूर्ति की बिगड़ती स्थिति को लेकर सदन में तीखी चर्चा देखने को मिली। खासकर संतालपरगना क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिसने राज्य में पेयजल संकट की गंभीरता को उजागर कर दिया।

विधायक हेमलाल मुर्मू ने लिट्टीपाड़ा समेत संतालपरगना के कई इलाकों की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिसके कारण बड़ी संख्या में चापाकल निष्क्रिय हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

इस पर जवाब देते हुए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्वीकार किया कि राज्य में जलस्तर गिरना एक गंभीर चुनौती बन चुका है। उन्होंने सदन को बताया कि झारखंड में कुल 69,916 चापाकल खराब हैं, जिनमें से केवल पाकुड़ जिले में ही 3,446 चापाकल बंद पड़े हैं। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि करीब 44,906 चापाकलों की मरम्मत के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और काम शुरू हो चुका है।

मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने का अवसर नहीं छोड़ा। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन में विफल रही है। उन्होंने कहा कि चापाकलों की मरम्मत के लिए केंद्र पर निर्भरता राज्य की स्थिति को दर्शाती है, जो चिंताजनक है।

मरांडी ने जल संकट को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि जहां दुनिया ऊर्जा संसाधनों की कमी से जूझ रही है, वहीं झारखंड में लोग पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो शासन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

हालांकि, विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि चापाकलों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने स्वयं संसाधन उपलब्ध कराए हैं और केंद्र से सहायता लेने की बात निराधार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि खराब चापाकलों को जल्द से जल्द दुरुस्त करने की दिशा में कार्य तेजी से जारी है।