झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन उद्योग और श्रम विभाग से संबंधित बजट प्रस्तावों पर सदन में लंबी और तीखी चर्चा हुई। विभिन्न दलों के विधायकों ने राज्य में रोजगार, औद्योगिक विकास, श्रमिक अधिकार और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर अपने-अपने विचार रखे।
बहस की शुरुआत करते हुए विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों के मामले में काफी समृद्ध राज्य है और खनिज संपदा के मामले में देश में दूसरा स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि राज्य में श्रम आधारित योजनाओं की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन इन योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने से श्रमिकों तक उनका लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और सार्वजनिक क्षेत्र को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि एचईसी जैसे बड़े औद्योगिक संस्थान आज संकट से जूझ रहे हैं और कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा।
वहीं विधायक सुरेश पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हमेशा नकारात्मक राजनीति करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के लिए कई कदम उठाए हैं और हजारों लोगों को नौकरी दी गई है। उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय राज्य सरकार ने बाहर फंसे मजदूरों को सुरक्षित वापस लाने का काम किया।
अरूप चटर्जी ने श्रम कानूनों और मजदूर हितों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) पर ट्रेड यूनियनों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने श्रम विभाग की विभिन्न समितियों के पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा कि इनमें जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर मजदूरों को तय न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है और उद्योगों में औचक निरीक्षण की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने कहा कि झारखंड में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति की जरूरत है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक हजारों करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, लेकिन कौशल विकास की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही। उन्होंने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों का उपयोग उद्योगों में बढ़ाया जाना चाहिए।
सुदीप गुड़िया ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य के विकास में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने वनोपज और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। साथ ही खूंटी जैसे क्षेत्रों में पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थान खोलने की मांग की, ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें।
जगत मांझी ने पलायन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य के मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में दूसरे राज्यों के मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि स्थानीय श्रमिकों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की मृत्यु होने पर उनके शव को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाने का सुझाव भी दिया।
वहीं विधायक रागिनी सिंह ने युवाओं को रोजगार के अवसर न मिलने और श्रमिकों की कार्य परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में मजदूरों को उचित वेतन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने खनन क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की स्वास्थ्य समस्याओं और झरिया पुनर्वास योजना की धीमी गति पर भी सवाल उठाए।
सदन में हुई इस विस्तृत चर्चा के दौरान उद्योग और श्रम से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।