झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन सदन में आदिम जनजातियों के लिए आवंटित अनाज के वितरण में अनियमितता का मामला उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के सवाल पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि साहिबगंज जिले के पतना प्रखंड में तैनात प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी पर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं।
मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि संबंधित अधिकारी ने करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के खाद्यान्न का वितरण नहीं किया, जो विशेष रूप से आदिम जनजातियों के लिए निर्धारित था। मामले की जानकारी मिलने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर मुख्य आपूर्ति अधिकारी और सहकारिता विभाग के सचिव से चर्चा की गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वही अधिकारी पतना में मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। फिलहाल उन्हें उस पद से हटा दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ प्रपत्र ‘क’ के तहत कार्रवाई शुरू की गई है और प्रमाण पत्र वसूली (सर्टिफिकेट) केस दर्ज किया गया है। सरकार ने उन्हें निलंबित करने का आदेश भी जारी कर दिया है।
इसी दौरान हटिया विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा भी सदन में उठा। विधायक नवीन जायसवाल ने कुटे, लाबेत, तरिल समेत आसपास के इलाकों के विस्थापितों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए बताया कि दिसंबर 2019 में उनके पुनर्वास के लिए 400 आवास बनाए गए थे। उन्होंने सरकार से पूछा कि अब तक इनमें से कितने घर विस्थापित परिवारों को सौंपे गए हैं।
इस पर मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि पात्र सभी विस्थापितों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि विस्तृत जानकारी उपलब्ध न होने के कारण इस प्रश्न पर आगे की चर्चा फिलहाल के लिए स्थगित कर दी गई।