विधानसभा में गरमाया हटिया के विस्थापितों का मुद्दा, 212 करोड़ के आवास तैयार लेकिन अब तक नहीं हुआ पुनर्वास

विधानसभा में गरमाया हटिया के विस्थापितों का मुद्दा, 212 करोड़ के आवास तैयार लेकिन अब तक नहीं हुआ पुनर्वास

विधानसभा में गरमाया हटिया के विस्थापितों का मुद्दा, 212 करोड़ के आवास तैयार लेकिन अब तक नहीं हुआ पुनर्वास
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 14, 2026, 12:42:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन हटिया क्षेत्र के विस्थापित परिवारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान विधायक नवीन जायसवाल ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2019 में लगभग 212 करोड़ रुपये खर्च कर आवास तैयार किए गए थे, लेकिन अब तक इनमें किसी भी परिवार को बसाया नहीं गया है। उन्होंने बताया कि कुल 393 परिवारों को इन मकानों में बसाने की योजना थी, जो अभी तक लागू नहीं हो सकी है।

इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि विस्थापितों के सत्यापन की प्रक्रिया में कई खामियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए कोलकाता की एक निजी परामर्शदाता कंपनी की सेवाएं ली गई थीं, जिसके कारण कई विसंगतियां पैदा हो गईं। मंत्री के अनुसार, कंपनी द्वारा तैयार की गई सूची की अब दोबारा जांच की जा रही है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक जायसवाल ने यह भी उल्लेख किया कि विस्थापितों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार में प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया था और इसके लिए एक समझौता भी हुआ था। इस पर मंत्री ने कहा कि विस्थापन से प्रभावित गांवों की सूची में कुल आठ गांवों को शामिल किया गया था, लेकिन जगन्नाथपुर और कल्याणपुर जैसे कुछ गांव उस सूची में नहीं थे। इसके अलावा पंचाट की सूची और उपलब्ध रिकॉर्ड में भी कई नामों में अंतर पाया गया है।

मंत्री सुदिव्य सोनू ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग विस्थापितों के नाम पर जमीन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे प्रयासों को सरकार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि लाबेद और तिरिल गांव में सर्वे के लिए पहुंची टीम का भी कुछ लोगों ने विरोध किया था।

सरकार की ओर से यह भी साफ किया गया कि जो जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है, उसे रैयतों को वापस नहीं किया जा सकता। हालांकि मंत्री ने आश्वस्त किया कि वास्तविक विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी और उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत स्थिति अगले विधानसभा सत्र से पहले स्पष्ट कर दी जाएगी।