झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन सदन में बिजली आपूर्ति की समस्याओं और धान खरीद की व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाईं, जिस पर संबंधित मंत्रियों ने सरकार का पक्ष रखा और सुधारात्मक कदमों की जानकारी दी।
विधायक जयराम महतो ने अपने क्षेत्र में बिजली से जुड़ी परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर पोल लगाने, तार बदलने और ट्रांसफॉर्मर बदलने में काफी देरी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों पर जुर्माने का अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो पाता।
इस पर विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि बिजली सेवा पूरी तरह मुफ्त नहीं है, उपभोक्ता नियमित रूप से बिल का भुगतान करते हैं, इसलिए उन्हें बेहतर आपूर्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि खराब ट्रांसफॉर्मर को 24 घंटे के भीतर नहीं बदला जाता, तो इसके लिए दंड का भी प्रावधान है।
ऊर्जा मंत्री योगेंद्र प्रताप ने जवाब देते हुए कहा कि बिजली से संबंधित शिकायतें कार्यपालक अभियंता के स्तर पर दर्ज कराई जा सकती हैं और उनका समाधान किया जाएगा। विधायक प्रदीप प्रसाद ने सुझाव दिया कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाना चाहिए, ताकि लोग आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
जयराम महतो ने ग्रामीण इलाकों में लगाए जा रहे जुर्मानों का मुद्दा भी उठाया। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध करा रही है और इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार ही शुल्क लिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि अब ट्रांसफॉर्मर की आपूर्ति को तेज करने के लिए जीपीएस से लैस वाहनों के माध्यम से उन्हें पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
सत्र के दौरान विधायक अरूप चटर्जी के सवाल पर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने राज्य में धान खरीद की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को भुगतान एकमुश्त किया जा रहा है और इस वर्ष अब तक कुल लक्ष्य का 50 प्रतिशत से अधिक धान खरीदा जा चुका है। सरकार का प्रयास है कि 31 मार्च तक अधिकतम मात्रा में खरीद पूरी कर ली जाए, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसकी समय सीमा बढ़ाई भी जा सकती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि किसानों की भागीदारी बढ़ रही है और बड़ी संख्या में वे पैक्स के माध्यम से धान बेचने के लिए आगे आ रहे हैं। राज्य में फिलहाल 831 धान खरीद केंद्र संचालित हैं। साथ ही, भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए सभी प्रखंडों में गोदाम निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।
इस पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर आरोप लगाया कि धान खरीद की मौजूदा व्यवस्था में बिचौलियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए जनवरी तक ही धान खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की सीमा से सटे जिलों में धान खरीद की मात्रा असामान्य रूप से अधिक रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए।