झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने राज्य में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बकाया वेतन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान में हो रही देरी न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि इससे पुलिस बल के मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
दूबे ने स्पष्ट किया कि कुछ चुनिंदा मामलों या व्यक्तियों की वजह से पूरे पुलिस विभाग को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मी लगातार कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, ऐसे में उनके वेतन को रोकना उनके साथ अन्याय के समान है।
उन्होंने इस मुद्दे के सामाजिक और पारिवारिक प्रभावों पर भी जोर दिया। दूबे के अनुसार, अधिकांश सरकारी कर्मचारियों की दैनिक जरूरतें; जैसे भोजन, बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियां और अन्य आवश्यक खर्च, पूरी तरह मासिक आय पर निर्भर होती हैं। वेतन में देरी से इन सभी पहलुओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द वेतन जारी करने की दिशा में कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुलिस बल के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी सवाल है।
दूबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।