मां दुर्गा की आराधना का पर्व आज से शुरू; जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नौ दिनों के नियम

मां दुर्गा की आराधना का पर्व आज से शुरू; जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नौ दिनों के नियम

मां दुर्गा की आराधना का पर्व आज से शुरू; जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नौ दिनों के नियम
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 19, 2026, 11:17:00 AM

चैत्र मास की नवरात्रि आज से शुरू हो गई है, जो 27 मार्च तक चलेगी। इस पावन पर्व के दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं। प्रत्येक दिन देवी के एक अलग रूप की आराधना का विशेष महत्व होता है, जिसे शक्ति, साहस और जीवन के मूल्यों से जोड़ा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में विधिपूर्वक पूजा और व्रत रखने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। भक्त पूरे नौ दिन या अष्टमी तक उपवास रखकर और नियमित पूजा-अर्चना कर माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

कलश स्थापना के शुभ समय
आज कलश स्थापना के लिए सुबह 6:52 बजे से 7:46 बजे तक पहला शुभ समय निर्धारित है। वहीं दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा।

पूजा के अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:51 बजे से 5:59 बजे तक रहा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक रहेगा।

नवरात्रि पूजन में लाल वस्त्र, पुष्प और माला, इलायची, लौंग, कपूर, अक्षत, हल्दी, सुपारी, मौली, रोली, जटा वाला नारियल, आम या अशोक के पत्ते, अनाज, जौ, कलश, गंगाजल, मिट्टी का पात्र, पवित्र मिट्टी तथा अखंड ज्योति के लिए दीपक और रुई की बाती का उपयोग किया जाता है।

कलश स्थापना की विधि
नवरात्रि के प्रथम दिन स्नान के बाद उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल तैयार किया जाता है। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मिट्टी से भरे पात्र में जौ बोए जाते हैं। इसके बाद जल से भरे कलश में सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते सजाए जाते हैं और नारियल स्थापित किया जाता है। यह कलश देवी के समीप स्थापित किया जाता है।

पूजा की प्रक्रिया
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है। इसके पश्चात अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक जलाए रखना शुभ माना जाता है। भक्त माता को चुनरी अर्पित कर फूल, धूप, दीप और कपूर से पूजन करते हैं। दुर्गा चालीसा, सप्तशती और देवी कवच का पाठ कर भोग अर्पित किया जाता है तथा सुबह-शाम आरती की जाती है।

इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया जाता है। लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित माना गया है। व्रत रखने वाले लोग सेंधा नमक, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे, साबूदाना और फलों का सेवन करते हैं। घर में अखंड ज्योति जलाने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए कि वह बुझने न पाए। इसके अलावा विवाद से बचना, संयमित व्यवहार रखना और बाल, नाखून आदि न काटना भी इस दौरान महत्वपूर्ण नियमों में शामिल है।