विधानसभा में उद्योग, सड़क और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बहस, विस्थापितों के अधिकार और खनन नियमों पर भी उठे सवाल

विधानसभा में उद्योग, सड़क और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बहस, विस्थापितों के अधिकार और खनन नियमों पर भी उठे सवाल

विधानसभा में उद्योग, सड़क और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बहस, विस्थापितों के अधिकार और खनन नियमों पर भी उठे सवाल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 16, 2026, 2:32:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विधायकों और मंत्रियों के बीच व्यापक चर्चा हुई। उद्योग स्थापना, शिक्षा व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और विस्थापितों के अधिकार जैसे विषय सदन में प्रमुखता से उठाए गए।

पांकी से विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने अपने क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग यूनिट के साथ चीनी मिल और अन्य उद्योग स्थापित करने की मांग रखी। इस पर उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार स्वयं उद्योग स्थापित नहीं करती है। उन्होंने कहा कि यदि निजी कंपनियां निवेश के लिए प्रस्ताव देती हैं तो सरकार उस पर विचार कर सकती है। इस दौरान विधायक सीपी सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए विदेश यात्राएं करती है, इसलिए उद्योग मंत्री को भी ऐसे दौरों में शामिल किया जाना चाहिए।

वहीं देवघर में शिक्षकों की कमी का मुद्दा विधायक उदय शंकर सिंह ने उठाया। इस पर शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू ने बताया कि संबंधित विद्यालय में 784 विद्यार्थियों के लिए 17 शिक्षक कार्यरत हैं, जो मौजूदा मानकों के अनुसार पर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में बेंच और डेस्क की व्यवस्था भी की जा रही है।

खनन क्षेत्रों में विस्थापन और अधिकारों को लेकर विधायक रौशन लाल चौधरी ने केरेडारी और बड़कागांव के विस्थापितों की स्थिति सदन के सामने रखी। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को संवैधानिक अधिकारों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पर खान मंत्री दीपक बिरूआ ने जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2013 के बाद खनन करने वाली कंपनियों पर राज्य सरकार के नियम लागू होंगे और विस्थापितों के मुद्दों को सुलझाने के लिए विस्थापन आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

सड़क निर्माण से जुड़े मुद्दे पर विधायक अमित महतो ने सोनाहातू पूर्वी और पश्चिमी सड़क को पथ निर्माण विभाग को सौंपने की मांग की। मंत्री सुदिव्य सोनू ने बताया कि लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण प्रस्तावित है और विभाग ने अग्रिम योजना के तहत इसका विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर लिया है।

इसी दौरान कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने पांकी क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में इस सड़क पर लगभग 500 लोगों की जान जा चुकी है, जिसका मुख्य कारण कोयला और पत्थर ढोने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार है। मंत्री सुदिव्य सोनू ने बताया कि 4 मार्च को इस सड़क की डिफॉल्ट लाइबिलिटी समाप्त हो चुकी है और अब ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं विधायक रागिनी सिंह ने झरिया में नल-जल योजना के अधूरे कार्य का मुद्दा उठाया। जवाब में मंत्री सुदिव्य सोनू ने बताया कि इस योजना का करीब 49 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आगे की प्रगति के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से आठ और रेलवे से दो अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने बाकी हैं। आवश्यक मंजूरी मिलते ही परियोजना को पूर्ण किया जाएगा।