झारखंड सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासन और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस योजना के तहत चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए संबंधित विभाग ने दावेदारी करने वाली पंचायतों का निरीक्षण शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह जांच अभियान 8 अप्रैल तक जारी रहेगा, जिसके बाद चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत पंचायतों को तीन अलग-अलग वर्गों (उत्कृष्ट, स्वच्छ और स्वस्थ) में सम्मानित किया जाना है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।
पुरस्कार के रूप में चयनित पंचायतों को उनकी रैंकिंग के आधार पर 4 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस राशि का उपयोग पंचायतें अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को और गति देने के लिए कर सकेंगी।
सरकार ने इस बार चयन प्रक्रिया को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया है। केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाएगा, बल्कि पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर किए गए कार्यों का पूर्ण भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
इसके अलावा, जिला स्तर पर चुनी गई ग्राम सभाओं में से 10 प्रतिशत का राज्य स्तरीय टीम द्वारा यादृच्छिक निरीक्षण किया जाएगा, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
मूल्यांकन के दौरान ग्राम सभाओं की नियमित बैठकें, स्वच्छता की स्थिति, खुले में शौच से मुक्ति, कचरा प्रबंधन, बच्चों के टीकाकरण, कुपोषण की स्थिति और महिलाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को आधार बनाया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि राज्य की कौन-सी पंचायतें आदर्श के रूप में उभरती हैं और ‘मॉडल पंचायत’ का दर्जा हासिल करती हैं।