सिद्धू-कान्हू युवा खेल क्लब योजना में तेज़ी, लेकिन अधूरे आवेदन बने बड़ी बाधा
सिद्धू-कान्हू युवा खेल क्लब योजना में तेज़ी, लेकिन अधूरे आवेदन बने बड़ी बाधा
झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गई सिद्धू-कान्हू युवा खेल क्लब योजना ग्रामीण स्तर पर खेलों को पुनर्जीवित करने और युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के जरिए राज्य सरकार गांवों में खेल संस्कृति को मजबूत करने, युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक कुरीतियों से दूर रखने तथा उन्हें खेल सामग्री और खेल आयोजन के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध करा रही है।
राज्यभर में इस योजना को शानदार प्रतिक्रिया मिली है। अब तक कुल 4,356 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1,966 क्लबों को औपचारिक स्वीकृति मिल चुकी है। यानी लगभग 45 प्रतिशत युवा क्लबों का गठन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है।
सबसे बड़ी मुश्किल: अधूरे और लंबित आवेदन
इस योजना को आगे बढ़ाने में अधूरे और रुके हुए आवेदन बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं।
— 2,017 आवेदन आवेदकों द्वारा अधूरे छोड़े गए हैं, जहां जरूरी दस्तावेज या सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
— अधिकारी स्तर पर भी कई आवेदन लंबित हैं—अधिकारी-1 के पास 59, अधिकारी-2 के पास 50 और अधिकारी-3 के पास 234 आवेदन अटके हुए हैं।
— विभागीय स्तर पर अब केवल 30 आवेदन मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं।
जिलेवार स्थिति
गुमला जिला इस योजना में सबसे आगे है, जहां 297 युवा खेल क्लबों को मंजूरी दी जा चुकी है। चतरा में 240 और रांची में 218 क्लबों को हरी झंडी मिली है।
पूर्वी सिंहभूम में जहां 154 क्लब स्वीकृत हुए हैं, वहीं 395 आवेदन आवेदकों द्वारा अधूरे छोड़े गए हैं, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है।
पाकुड़ जिले में 139 आवेदन अधिकारी स्तर पर लंबित हैं, जो राज्य में सबसे ज्यादा अटके हुए आवेदनों में शामिल हैं।