झारखंड में सैटेलाइट निगरानी से अफीम पर वार, 3 साल में 300 से ज्यादा लोकेशन चिन्हित

झारखंड में सैटेलाइट निगरानी से अफीम पर वार, 3 साल में 300 से ज्यादा लोकेशन चिन्हित

झारखंड में सैटेलाइट निगरानी से अफीम पर वार, 3 साल में 300 से ज्यादा लोकेशन चिन्हित
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 30, 2026, 2:22:00 PM

झारखंड में अवैध अफीम की खेती पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में सैटेलाइट इमेजरी के जरिए ऐसे इलाकों की पहचान की जा रही है, जहां छिपकर अफीम की खेती की जा रही है। इसके बाद संबंधित स्थलों का सत्यापन कर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

वर्ष 2024 से 2026 के बीच जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में कुल 316 संदिग्ध लोकेशनों की सैटेलाइट तस्वीरें पुलिस को उपलब्ध कराई गईं। इनमें से 286 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। यह पहल खासतौर पर उन दुर्गम पहाड़ी और वन क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है, जहां पारंपरिक तरीकों से निगरानी मुश्किल होती है।

जिला-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो चतरा और खूंटी अब भी अवैध अफीम उत्पादन के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। चतरा में सबसे अधिक 96 लोकेशनों की पहचान हुई और सभी पर कार्रवाई की गई। खूंटी में 63 मामलों में सटीक कार्रवाई दर्ज की गई। इसी तरह रांची (24), पलामू (21), लातेहार (24) और सरायकेला (25) जिलों में भी चिन्हित सभी स्थानों पर कार्रवाई की पुष्टि हुई।

हालांकि कुछ जिलों में कार्रवाई आंशिक रही। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में भेजी गई 21 तस्वीरों में से 18 पर कार्रवाई हो सकी, जबकि रांची से जुड़े एक अन्य सेट में 35 संदिग्ध स्थानों में से 20 पर ही कार्रवाई की गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सैटेलाइट डेटा के उपयोग से ऐसे क्षेत्रों में पहुंच संभव हुई है, जहां पहले निगरानी और अभियान चलाना बेहद कठिन था। आने वाले समय में इस तकनीक के और व्यापक उपयोग की योजना है, ताकि राज्य में अवैध अफीम की खेती पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।