सरकारी भर्ती में संविदा कर्मियों की होगी बल्ले-बल्ले, झारखंड सरकार ने बदले नियम
सरकारी भर्ती में संविदा कर्मियों की होगी बल्ले-बल्ले, झारखंड सरकार ने बदले नियम
झारखंड सरकार राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से कार्यरत संविदा, दैनिक वेतनभोगी, एकमुश्त पारिश्रमिक तथा आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित सरकारी सेवा में अवसर दिलाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित नीति के तहत ऐसे कर्मचारियों को सरकारी नियुक्ति की प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) देने का प्रावधान किया गया है।
इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने प्रारूप तैयार कर विधि विभाग और वित्त विभाग की सहमति के लिए भेज दिया है। दोनों विभागों की मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे सचिवालय, क्षेत्रीय कार्यालयों, बोर्ड-निगमों और विभिन्न सरकारी संस्थानों में वर्षों से कार्यरत हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि लंबे समय से सरकारी तंत्र में कार्य कर रहे कर्मचारियों के अनुभव और कार्यकुशलता को नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में भी महत्व दिया जाए। सरकार का मानना है कि विभागीय कार्यप्रणाली से परिचित और व्यावहारिक अनुभव रखने वाले कर्मियों की दक्षता को प्रतियोगी परीक्षा में भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
प्रस्ताव के अनुसार, केवल सेवा अवधि पूरी होने पर ही अतिरिक्त अंक का लाभ मिलेगा। 36 माह तक कार्य करने वाले कर्मचारियों को कोई वेटेज नहीं मिलेगा, जबकि 37वें माह से अतिरिक्त अंक मिलने की शुरुआत होगी। इसके बाद सेवा अवधि बढ़ने के साथ वेटेज भी क्रमशः बढ़ता जाएगा।
प्रस्तावित फार्मूले के मुताबिक, 37वें माह से 0.15 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। 40 माह की सेवा पूरी होने पर यह बढ़कर 0.60 प्रतिशत हो जाएगा। 60 माह की सेवा पर 3.60 प्रतिशत, 120 माह पर 12.60 प्रतिशत और 136 माह अथवा उससे अधिक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को अधिकतम 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त वेटेज देने का प्रावधान किया गया है। इससे अधिक अंक किसी भी स्थिति में नहीं दिए जाएंगे।
यदि यह प्रस्ताव मंजूरी प्राप्त कर लागू होता है, तो वर्षों से अस्थायी आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए नियमित सरकारी नौकरी हासिल करने की राह पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है। सरकार का मानना है कि अनुभव और दक्षता को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से योग्य और प्रशिक्षित कर्मियों को उचित अवसर मिलेगा।