रिम्स की साख पर सवाल! डॉ. राजकुमार के इस्तीफे पर विपक्ष के निशाने पर सरकार
रिम्स की साख पर सवाल! डॉ. राजकुमार के इस्तीफे पर विपक्ष के निशाने पर सरकार
रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) राजकुमार के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधायक सरयू राय ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक ईमानदार और सक्षम अधिकारी को लंबे समय तक प्रशासनिक दबाव में रखा गया और अंततः परिस्थितियां ऐसी बना दी गईं कि उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
सरयू राय ने दावा किया कि अनुसूचित वर्ग से आने वाले डॉ. राजकुमार को रिम्स शासी निकाय की पहली बैठक से ही निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, सरकार ने उन्हें पद से हटाने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार झारखंड हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित कार्रवाइयों पर रोक लगाई। इसके बावजूद उन्हें लगातार परेशान करने का सिलसिला जारी रहा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस्तीफा देने से पहले, 8 जून को डॉ. राजकुमार ने स्वास्थ्य मंत्री, जो रिम्स शासी परिषद के अध्यक्ष भी हैं, को एक गोपनीय पत्र भेजा था। कथित तौर पर इस पत्र में उन्होंने पिछले एक वर्ष से मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न झेलने की बात कही थी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मरीजों की सुविधाओं के विस्तार, पुराने भवनों के नवीनीकरण और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू कराने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद उन्हें सहयोग के बजाय लगातार दबाव का सामना करना पड़ा।
सरयू राय के मुताबिक, 15 अप्रैल 2025 को हुई शासी परिषद की बैठक में उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन डॉ. राजकुमार दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उपस्थित थे, उसी दिन उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। बाद में उन्हें 11 बिंदुओं वाला कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका उन्होंने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ जवाब भी दिया। इसके बावजूद शासी परिषद की बैठकों में उन्हें पद से हटाने का मुद्दा लगातार उठाया जाता रहा।
विधायक ने सरकार से सवाल किया कि जब उच्च न्यायालय बार-बार संबंधित कार्रवाइयों पर रोक लगा रहा था, तब भी एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की कोशिशें क्यों जारी रहीं। उन्होंने कहा कि यह विवाद केवल किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की विश्वसनीयता और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर विषय है। फिलहाल, इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।