रिम्स भूमि घोटाला मामले में आरोपी राजकिशोर बड़ाइक को राहत नहीं, एसीबी कोर्ट ने जमानत अर्जी ठुकराई
रिम्स भूमि घोटाला मामले में आरोपी राजकिशोर बड़ाइक को राहत नहीं, एसीबी कोर्ट ने जमानत अर्जी ठुकराई
रांची के बहुचर्चित रिम्स भूमि घोटाले में आरोपी राजकिशोर बड़ाइक को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद राजकिशोर बड़ाइक को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे शुक्रवार को सुनाते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
यह मामला सामने आने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया था। इसके बाद एसीबी ने जांच को गति देते हुए अप्रैल में इस प्रकरण से जुड़े चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, रिम्स परिसर से जुड़ी अधिग्रहित सरकारी जमीन को निजी स्वामित्व वाली भूमि के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बड़े पैमाने पर दस्तावेजी हेरफेर की गई। आरोप है कि वर्षों पहले सरकार द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी जमीन को फर्जी रिकॉर्ड और बनावटी वंशावली के आधार पर निजी संपत्ति दर्शाया गया और बाद में उसकी खरीद-बिक्री कर दी गई।
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर नकली दस्तावेज तैयार कर भूमि पर स्वामित्व का दावा स्थापित किया गया। इसके बाद संबंधित जमीन को बिल्डरों के हाथों बेचने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। एजेंसी का मानना है कि यह केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के अवैध हस्तांतरण की सुनियोजित साजिश थी।
मामले की जांच का दायरा अब केवल कथित भू-माफियाओं तक सीमित नहीं है। एसीबी की निगाह कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी है। जांच के दौरान 16 सरकारी कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिकॉर्ड में बदलाव, दस्तावेजों के सत्यापन और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में किस स्तर पर मिलीभगत हुई।
एसीबी के अनुसार, रिम्स से संबंधित लगभग सात एकड़ अधिग्रहित भूमि को फर्जी कागजात के आधार पर निजी जमीन बताकर करीब 31 लाख रुपये में बिल्डरों को बेच दिया गया था। इसी मामले में एसीबी ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी।
रिम्स भूमि घोटाला झारखंड के प्रमुख भूमि विवादों में गिना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एसीबी अब उन अन्य लोगों की भी पहचान करने का प्रयास कर रही है, जिन्हें इस कथित अवैध सौदे से लाभ पहुंचा हो सकता है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद राजकिशोर बड़ाइक की कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं, जबकि एजेंसी पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।