जांच के घेरे में निलंबित IAS विनय चौबे के रिश्तेदार, गुरुग्राम की महंगी संपत्तियों में छुपाया कथित काला धन

जांच के घेरे में निलंबित IAS विनय चौबे के रिश्तेदार, गुरुग्राम की महंगी संपत्तियों में छुपाया कथित काला धन

जांच के घेरे में निलंबित IAS विनय चौबे के रिश्तेदार, गुरुग्राम की महंगी संपत्तियों में छुपाया कथित काला धन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 06, 2026, 3:46:00 PM

जेल में बंद और निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को अहम सुराग हाथ लगते जा रहे हैं। दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की गहन पड़ताल के बाद जांच एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि हरियाणा के गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां कथित तौर पर उनके करीबी रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गईं।

जांच में सामने आया है कि विनय चौबे के बहनोई शिपिज त्रिवेदी को कथित तौर पर अवैध धन को वैध निवेश में बदलने के लिए प्रमुख कड़ी के रूप में इस्तेमाल किया गया। एसीबी को सबसे पहले गुरुग्राम स्थित एआर बिल्डर्स की एक आवासीय परियोजना में अनियमितता के संकेत मिले, जहां लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य का फ्लैट शिपिज त्रिवेदी और प्रियंका त्रिवेदी के नाम पर पंजीकृत पाया गया।

रिकॉर्ड बताते हैं कि इस संपत्ति की खरीद में भुगतान की ऐसी परतदार व्यवस्था अपनाई गई, जिससे वास्तविक धन स्रोत को छिपाया जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि पारिवारिक संबंधों की आड़ में कथित अवैध कमाई को सुरक्षित रियल एस्टेट निवेश में बदला गया।

इसी कड़ी में एआईपीएल ऑटोग्राफ परियोजना भी जांच के दायरे में आई, जहां करीब एक करोड़ रुपये की एक यूनिट ‘ट्राइब ट्रस्ट कंपनी’ के नाम पर बुक की गई। एजेंसियों के अनुसार, इस ट्रस्ट का इस्तेमाल सामाजिक या परोपकारी उद्देश्यों के बजाय संपत्ति के असली नियंत्रण को कई स्तरों में छिपाने के लिए किया गया। कागजों में ट्रस्ट का नाम होने के बावजूद, वास्तविक लाभ और नियंत्रण उसी पारिवारिक नेटवर्क के पास बताया जा रहा है, जिसमें शिपिज त्रिवेदी की केंद्रीय भूमिका बताई गई है।

न्यू गुरुग्राम के स्पेस टावर में स्थित एक महंगी कमर्शियल प्रॉपर्टी भी अब जांच रडार पर है। दस्तावेजी साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि इस संपत्ति को पहले विभिन्न अस्पष्ट संरचनाओं के जरिए रखा गया और बाद में योजनाबद्ध तरीके से शिपिज त्रिवेदी के नाम स्थानांतरित किया गया।

जांच एजेंसियों का आकलन है कि शिपिज त्रिवेदी केवल नाममात्र के संपत्ति धारक नहीं, बल्कि कथित तौर पर काले धन के प्रवाह को घुमाने वाली पूरी श्रृंखला की अहम कड़ी हैं। गुरुग्राम के रियल एस्टेट बाजार को इस कथित नेटवर्क द्वारा अवैध धन निवेश के सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया गया।

फिलहाल एजेंसियां इन संपत्तियों को कुर्क करने और इस वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला के अंतिम बिंदुओं तक पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। यह मामला एक बार फिर नौकरशाही के भीतर कथित भ्रष्टाचार और धन शोधन के गंभीर आरोपों को उजागर करता नजर आ रहा है।