रांची : वाईएसएस आश्रम में परमहंस योगानंद की 74वीं महासमाधि जयंती पर साधु भंडारा का आयोजन

रांची : वाईएसएस आश्रम में परमहंस योगानंद की 74वीं महासमाधि जयंती पर साधु भंडारा का आयोजन

रांची : वाईएसएस आश्रम में परमहंस योगानंद की 74वीं महासमाधि जयंती पर साधु भंडारा का आयोजन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 07, 2026, 5:18:00 PM

गुरुदेव परमहंस योगानंद की 74वीं महासमाधि जयंती के अवसर पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) के रांची आश्रम में विशेष साधु भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न आध्यात्मिक संस्थाओं से जुड़े संतों और साध्वियों को आमंत्रित कर उनका सम्मानपूर्वक सत्कार किया गया।

परमहंस योगानंद, जिन्होंने योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की और विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक पुस्तक “ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी (योगी कथाअमृत)” लिखी, उन्होंने 7 मार्च 1952 को महासमाधि प्राप्त की थी। उनकी स्मृति में वाईएसएस रांची आश्रम हर वर्ष इस दिन आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सेवा गतिविधियों का आयोजन करता है।

संतों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन

इस वर्ष आयोजित साधु भंडारे में रांची और आसपास के क्षेत्रों के अलग-अलग आश्रमों तथा आध्यात्मिक संगठनों से लगभग 50 साधु-संत और साध्वियाँ शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की गई।

इसके साथ ही उनके आध्यात्मिक योगदान के सम्मान में उन्हें शॉल, पुष्पमालाएँ, वस्त्र और प्रतीकात्मक सम्मान राशि भी भेंट की गई। योगदा सत्संग सोसाइटी के संन्यासियों ने स्वयं उपस्थित संतों को भोजन परोसकर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में साधु-संतों के सम्मान की भावना को जीवंत किया।

इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन (तुपुदाना और मोराबादी), भारत सेवाश्रम संघ, श्री श्री आनंदमयी संघ, मातृकाश्रम, चिन्मय आश्रम, महर्षि मेही आश्रम और राम मंदिर के संत शामिल थे।

रांची आश्रम का ऐतिहासिक महत्व

योगदा सत्संग सोसाइटी का रांची आश्रम ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1917 में परमहंस योगानंद ने यहीं पर पहला योगदा सत्संग ब्रह्मचर्य विद्यालय स्थापित किया था। इस संस्थान में आध्यात्मिक शिक्षा को आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ जोड़ने की अनूठी पहल की गई थी। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया निःस्वार्थ सेवा, आध्यात्मिक एकता और भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान को आगे बढ़ाने का कार्य लगातार कर रही है।