“माधो लहर” के जननेता माधव लाल सिंह का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

“माधो लहर” के जननेता माधव लाल सिंह का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

“माधो लहर” के जननेता माधव लाल सिंह का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 13, 2026, 4:04:00 PM

झारखंड के वरिष्ठ राजनीतिक नेता और गोमिया विधानसभा क्षेत्र से 4 बार विधायक रहे माधव लाल सिंह का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और पहले बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। हालत गंभीर होने पर उन्हें रांची स्थित पल्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर सामने आते ही गोमिया समेत पूरे बोकारो क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे राज्य की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पूर्व मंत्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि माधव लाल सिंह ने अविभाजित बिहार और झारखंड सरकार में मंत्री रहते हुए लंबे समय तक जनसेवा की और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। साथ ही अधिकारियों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया गया है।

cm tweet 

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी शोक संदेश जारी कर कहा कि माधव लाल सिंह ने राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों पर उल्लेखनीय काम किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन झारखंड के सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति है।

माधव लाल सिंह का राजनीतिक सफर कई दशकों तक प्रभावशाली रहा। वे गोमिया विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक निर्वाचित हुए और जनता के बीच एक मजबूत जननेता के रूप में पहचान बनाई। अविभाजित बिहार सरकार में उन्होंने पर्यटन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई, जबकि झारखंड गठन के बाद परिवहन मंत्री पद भी संभाला।

गोमिया की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा। वर्ष 1977 से 2014 के बीच क्षेत्रीय राजनीति मुख्य रूप से माधव लाल सिंह और छत्रुराम महतो के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। उन्होंने कई स्थानीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे।

साल 1985 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है। उस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर “माधो लहर” पैदा की और कई स्थापित नेताओं को पीछे छोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। बाद के वर्षों में भी उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक मंचों से चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की।

राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद उनकी छवि एक सादगीपूर्ण, सहज और जमीनी नेता की रही। यही वजह थी कि वे दशकों तक गोमिया क्षेत्र की राजनीति के केंद्रीय चेहरों में शामिल रहे।