झारखंड में जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक अहम पहल शुरू की है। इसके तहत अब पूरे राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट से जुड़े संस्थानों और उपयोगकर्ताओं का जीआईएस आधारित मानचित्रण किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र की निगरानी और योजना निर्माण को मजबूत किया जा सके।
यह कदम बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है। योजना के तहत अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों सहित सभी संबंधित इकाइयों की विस्तृत सूची तैयार की जाएगी। साथ ही, इनसे उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट, उसके उपचार और अंतिम निपटान से जुड़ी सूचनाओं को व्यवस्थित रूप से एकत्रित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टेंडर जारी किया है। चयनित एजेंसी को राज्यभर में बायोमेडिकल अपशिष्ट से जुड़े आंकड़े जुटाने, संबंधित संस्थानों की पहचान करने और उनका भौगोलिक मानचित्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य न केवल अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट आकलन करना है, बल्कि भविष्य में आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों की योजना बनाना भी है। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रहण, उपचार और निपटान के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाओं की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआईएस आधारित यह प्रणाली राज्य में बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।