नारी शक्ति के नाम पर सियासत, भाजपा के कार्यक्रमों में मुद्दों से ज्यादा गाली-गलौज: आलोक दूबे

नारी शक्ति के नाम पर सियासत, भाजपा के कार्यक्रमों में मुद्दों से ज्यादा गाली-गलौज: आलोक दूबे

नारी शक्ति के नाम पर सियासत, भाजपा के कार्यक्रमों में मुद्दों से ज्यादा गाली-गलौज: आलोक दूबे
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 25, 2026, 3:42:00 PM

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा के “नारी शक्ति वंदन” कार्यक्रम और उसके साथ हुए आक्रोश प्रदर्शनों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों का फोकस महिलाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों से हटकर केवल कांग्रेस की आलोचना तक सीमित रह गया। दूबे के अनुसार, राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश स्तर तक भाजपा नेताओं के भाषणों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों पर ठोस चर्चा की कमी साफ दिखाई दी।

दूबे ने कहा कि विपक्ष के खिलाफ कार्यक्रमों में इस्तेमाल की गई भाषा राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं थी और इससे भाजपा की बेचैनी झलकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी “नारी शक्ति” की बात करती है, उसके मंचों पर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप क्यों हावी हैं।

कांग्रेस नेता ने कई चर्चित मामलों का हवाला देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि, महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों, कर्नाटक से जुड़े गंभीर अपराध के मामलों और बीएचयू से जुड़े प्रकरण का जिक्र किया। दूबे ने इन उदाहरणों के आधार पर दावा किया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार का रवैया सवालों के घेरे में है।

उन्होंने मणिपुर की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां लंबे समय से हिंसा जारी है, जबकि पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। इसके अलावा हाथरस, अंकिता भंडारी और बिलकिस बानो जैसे मामलों को भी उन्होंने उठाया, यह कहते हुए कि इन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।

आंकड़ों का हवाला देते हुए दूबे ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में रोजाना बड़ी संख्या में दुष्कर्म के मामले दर्ज होते हैं। उनका आरोप था कि कई राज्यों में स्थिति और चिंताजनक है, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में पीछे रही है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को घेरा। दूबे ने कहा कि संसद से पारित होने के बावजूद आरक्षण कानून का क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इस विषय पर ठोस पहल की जरूरत है।

अंत में उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर केवल कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक बदलाव के लिए जरूरी है कि सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।