झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस राजेश शंकर की एकल पीठ ने कुख्यात पीएलएफआई उग्रवादी सुलेमान सांडी पूर्ति की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, ऐसे में उसे राहत देना न्यायोचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी माना कि उसके खिलाफ आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है, जिससे उसे जमानत देना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
हालांकि जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुलेमान सांडी पूर्ति ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है, जिस पर फिलहाल सुनवाई जारी है।
2021 में हुई थी गिरफ्तारी
सुलेमान सांडी पूर्ति को पुलिस ने 1 जनवरी 2021 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से भारी मात्रा में हथियार और सामग्री बरामद हुई थी, जिसमें दो राइफल, .315 बोर की गोलियां, AK-47 के कारतूस और मैगजीन, मोबाइल फोन और अन्य सामान शामिल थे। यह बरामदगी उसके सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क से जुड़े होने की ओर संकेत करती है।
जांच के दौरान सामने आया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर मुरहू क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य को निशाना बनाया था। बताया जाता है कि संगठन के निर्देश पर वहां लगे जेसीबी, ट्रैक्टर, बाइक और अन्य मशीनों को आग के हवाले कर दिया गया था। घटना के दौरान दहशत फैलाने के उद्देश्य से गोलीबारी भी की गई थी।
NIA की जांच में कई खुलासे, चार्जशीट दाखिल
इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है, जिसने पीएलएफआई नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की है। जांच के दौरान संगठन की गतिविधियों और फंडिंग से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी ने अदालत को बताया कि सुलेमान सांडी पूर्ति के खिलाफ कुल 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं और इस संबंध में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने फिलहाल आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है।