झारखंड से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे पांच सांसदों को क्षेत्र विकास कार्यों के लिए अब तक कुल 84.4 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस फंड में से 56.19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। खर्च के मामले में भाजपा सांसद दीपक प्रकाश सबसे आगे हैं, जबकि काम पूरा कराने की गति में सांसद आदित्य साहू शीर्ष पर रहे हैं।
दीपक प्रकाश को 22.76 करोड़ रुपये की निधि आवंटित की गई थी, जिसमें से उन्होंने 16.47 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। उन्होंने कुल 298 कार्यों की अनुशंसा की, जिनमें 121 कार्य पूरे हो चुके हैं। उनके क्षेत्र में 11.47 करोड़ रुपये के काम फिलहाल प्रगति पर हैं, जो कुल निधि का लगभग 55.9 प्रतिशत है। वहीं 1.93 करोड़ रुपये के कार्य अस्वीकृत हुए हैं। पूर्ण हो चुके कार्यों की राशि 7.10 करोड़ रुपये बताई गई है, जो 34.6 प्रतिशत के बराबर है।
काम को समय पर पूरा कराने के लिहाज से आदित्य साहू का प्रदर्शन सबसे बेहतर माना जा रहा है। उन्हें भी 17.86 करोड़ रुपये की निधि मिली, जिसमें से 15.03 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने 214 कार्यों की सिफारिश की थी, जिनमें 130 पूरे हो चुके हैं। उनके यहां 10.26 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जो कुल निधि का करीब 59.6 प्रतिशत है। इसके अलावा 5.81 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं, जबकि 1.15 करोड़ रुपये के प्रस्ताव अस्वीकृत हुए हैं।
सांसद महुआ मांझी को 17.86 करोड़ रुपये का फंड आवंटित हुआ, जिसमें से 14.28 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने 318 विकास कार्यों की अनुशंसा की थी। इनमें 149 कार्य पूरे हो चुके हैं। उनके क्षेत्र में 7.95 करोड़ रुपये के काम जारी हैं, जबकि 8.06 करोड़ रुपये के कार्य पूरे हो चुके हैं। 42.73 लाख रुपये के प्रस्ताव अस्वीकृत किए गए हैं।
डॉ. प्रदीप वर्मा को 12.96 करोड़ रुपये की निधि मिली है, जिसमें से 7.24 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने 120 कार्यों की सिफारिश की, लेकिन अब तक एक भी कार्य पूरा नहीं हो सका है। हालांकि 9.65 करोड़ रुपये के काम प्रगति पर हैं, जो कुल राशि का 76.7 प्रतिशत है। वहीं 2.92 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
डॉ. सरफराज अहमद को भी 12.96 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, लेकिन अब तक वे केवल 3.17 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं। उन्होंने 169 कार्यों की अनुशंसा की थी, जिनमें से सिर्फ तीन पूरे हुए हैं। उनके यहां 2.65 करोड़ रुपये के काम जारी हैं, जबकि 64.50 लाख रुपये के प्रस्ताव अस्वीकृत हुए हैं। पूर्ण कार्यों की राशि 59.69 लाख रुपये बताई गई है।
कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि झारखंड के राज्यसभा सांसदों में निधि खर्च, कार्य प्रगति और पूर्णता की रफ्तार में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे क्षेत्र विकास की गति पर भी सवाल उठ रहे हैं।