राज्यसभा रण में सियासी अंकगणित के बीच नाथवानी का दावा, कहा-काम के दम पर मिलेगा समर्थन
राज्यसभा रण में सियासी अंकगणित के बीच नाथवानी का दावा, कहा-काम के दम पर मिलेगा समर्थन
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमे विधायकों के समर्थन और वोटों के समीकरण को साधने में जुटे हैं। ऐसे माहौल में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने अपनी चुनावी रणनीति को बाकी उम्मीदवारों से अलग रखते हुए संख्या बल की बजाय अपने कार्यों और उपलब्धियों को प्रमुख आधार बताया है।
सोमवार को नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में नाथवानी ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह चुनाव को केवल आंकड़ों के खेल के रूप में नहीं देखते। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों की संख्या और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि उनका विश्वास समर्थन जुटाने की राजनीतिक कवायद से अधिक अपने कार्यों पर है। उनके अनुसार, विभिन्न दलों और जनप्रतिनिधियों के बीच उनके काम की स्वीकार्यता उन्हें सकारात्मक परिणाम दिलाने में मदद करेगी।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एनडीए के पास उपलब्ध विधायकों की संख्या और जीत के लिए जरूरी आंकड़े के बीच अंतर को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। हालांकि नाथवानी ने इन चर्चाओं को ज्यादा महत्व नहीं देते हुए कहा कि चुनाव के अंतिम परिणाम केवल संख्यात्मक विश्लेषण से तय नहीं होते, बल्कि उम्मीदवार की स्वीकार्यता और उसके योगदान की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अपने पक्ष को मजबूत करते हुए नाथवानी ने झारखंड के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने पूर्व कार्यकालों के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और आधारभूत संरचना से जुड़े कई प्रयास किए हैं। उनका दावा है कि इन पहलों का लाभ राज्य को मिला है और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
नाथवानी ने यह भी कहा कि यदि उन्हें एक और कार्यकाल का अवसर मिलता है, तो वे झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों पर पहले से अधिक सक्रियता के साथ काम करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, सामाजिक कल्याण और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
राज्यसभा चुनाव में जहां अधिकांश चर्चा राजनीतिक जोड़-घटाव और संभावित क्रॉस-वोटिंग के इर्द-गिर्द केंद्रित है, वहीं परिमल नाथवानी ने अपने प्रचार का केंद्र विकास कार्यों और पिछले योगदान को बनाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका यह अलग दृष्टिकोण चुनावी परिणामों में कितना असर छोड़ पाता है।