'पद्मभूषण स्वागतयोग्य, लेकिन भारत रत्न के हकदार हैं गुरुजी', JMM-कांग्रेस ने केंद्र से की अपील

'पद्मभूषण स्वागतयोग्य, लेकिन भारत रत्न के हकदार हैं गुरुजी', JMM-कांग्रेस ने केंद्र से की अपील

'पद्मभूषण स्वागतयोग्य, लेकिन भारत रत्न के हकदार हैं गुरुजी', JMM-कांग्रेस ने केंद्र से की अपील
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 23, 2026, 10:29:00 AM

नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित समारोह में झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान प्रदान करेंगी। दिवंगत नेता की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता हैं, यह सम्मान ग्रहण करेंगी।

इस सम्मान समारोह से पहले शिबू सोरेन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि शिबू सोरेन का सार्वजनिक जीवन, उनका संघर्ष और झारखंड के निर्माण में उनकी भूमिका उन्हें भारत रत्न का प्रबल दावेदार बनाती है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे पद्मभूषण का स्वागत करते हुए इसे पूरे राज्य के लिए गर्व का अवसर बताया।

मनोज पांडे ने कहा कि शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन को नई दिशा देने के साथ-साथ आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। उनके अनुसार, गुरुजी का जीवन संघर्ष और जनसेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, इसलिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया जाना चाहिए।

उधर, कांग्रेस ने भी इसी मांग का समर्थन किया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में शिबू सोरेन का योगदान ऐतिहासिक और बेजोड़ रहा है। उन्होंने पद्मभूषण दिए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुजी का योगदान भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान का भी अधिकारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है। इस अवसर के साथ ही उनके दीर्घकालीन योगदान को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग भी एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है।