रांची सिविल कोर्ट की महिला अधिवक्ताओं के साथ एससी-एसटी थाना प्रभारी द्वारा कथित धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। घटना के विरोध में रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता एकजुट हो गए हैं और शुक्रवार को न्यायिक कार्य से अलग रहने का निर्णय लिया है।
इस प्रकरण को लेकर रांची सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन ने आपात बैठक भी बुलायी है। वहीं रांची जिला बार एसोसिएशन ने पत्र के माध्यम से सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश से आग्रह किया है कि अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के कारण 6 फरवरी को सूचीबद्ध मामलों में किसी प्रकार का प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए। यह पत्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार गुरुवार को अधिवक्ता सविता कुजूर अपनी सहकर्मी अधिवक्ताओं सोनी लकड़ा, अमिता विरुवा और नीलिमा रानी के साथ एक मुवक्किल की शिकायत दर्ज कराने एससी-एसटी थाना पहुंची थीं। महिला अधिवक्ताओं का आरोप है कि थाना में मौजूद जांच अधिकारी महेंद्र बाड़ा ने शुरुआत में शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया।
इसके बाद जब अधिवक्ताएं थाना प्रभारी महेश मुंडा से शिकायत दर्ज कराने की मांग लेकर मिलीं, तो उन्होंने सहयोग करने के बजाय कथित रूप से ऊंची आवाज में धमकाना शुरू कर दिया।
महिला अधिवक्ताओं ने रांची एसएसपी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी महेश मुंडा ने कथित तौर पर गलत नीयत से अधिवक्ता सविता कुजूर का हाथ पकड़कर उन्हें दीवार की ओर धक्का दिया। साथ ही वहां मौजूद महिला वकीलों के साथ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद से वकीलों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और पूरे मामले पर बार एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है।