अब त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की मंजूरी से ही लागू होंगी सरकारी योजनाएं

अब त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की मंजूरी से ही लागू होंगी सरकारी योजनाएं

अब त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की मंजूरी से ही लागू होंगी सरकारी योजनाएं
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 29, 2025, 1:54:00 PM

अनुसूचित क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। कैबिनेट से स्वीकृत पेसा नियमावली 2025 के तहत अब किसी भी योजना को त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की सहमति के बिना लागू नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, यदि तय समयसीमा में संबंधित सभा कोई निर्णय नहीं लेती है, तो योजना को स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।

नियमावली के अनुसार योजनाओं की मंजूरी उस क्षेत्रीय स्तर पर निर्भर करेगी, जिस स्तर पर योजना लागू होनी है। ग्राम स्तर की योजनाओं के लिए ग्राम सभा, प्रखंड स्तर की योजनाओं के लिए पंचायत समिति और जिला स्तर की योजनाओं के लिए जिला परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और विकास कार्यों में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

गांवों के विकास की योजनाएं तैयार करने के लिए उपायुक्त द्वारा हर साल या छह महीने में एक मल्टी डिसिप्लिनरी टीम (MDT) गठित की जाएगी। यह टीम ग्राम सभा के साथ चर्चा कर विकास प्रस्ताव तैयार करेगी। बैठक के दौरान ग्रामीणों को योजना से मिलने वाले लाभ, अनुमानित खर्च और वित्तीय स्रोतों की पूरी जानकारी दी जाएगी। इसके बाद तैयार योजना को पारंपरिक ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

ग्राम सभा में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव में योजना के क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया, प्रत्येक चरण की लागत, फंडिंग का स्रोत, ठेकेदार की भूमिका और स्थानीय श्रमिकों के उपयोग का विवरण शामिल होगा। MDT द्वारा प्रस्ताव रखने के बाद ग्राम सभा को उस पर निर्णय लेने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा।

इस अवधि में ग्राम सभा को यह अधिकार होगा कि वह योजना के क्रियान्वयन पर शर्तें लगाए या उसमें संशोधन सुझाए। यदि 30 दिनों के भीतर कोई फैसला नहीं होता है, तो योजना को ग्राम सभा की स्वीकृति प्राप्त मानी जाएगी। वहीं, यदि योजना को लेकर सुनवाई चल रही हो और समय पर निर्णय न हो पाए, तो ग्राम सभा जिला विकास आयुक्त (DDC) से अतिरिक्त 30 दिनों का समय मांग सकती है।

पेसा नियमावली 2025 में पारंपरिक ग्राम सभा को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन का भी अहम अधिकार दिया गया है। लाभुकों का चयन सामान्यतः सरकार द्वारा तय मानकों के आधार पर किया जाएगा। लेकिन विशेष परिस्थितियों में ग्राम सभा इन मानकों में बदलाव कर सकती है।

यदि कोई परिवार गंभीर आर्थिक संकट में हो या किसी सदस्य की स्थिति अत्यंत नाजुक हो, तो ग्राम सभा सर्वसम्मति से तय मानदंडों में संशोधन कर उसे योजना का लाभ दे सकती है। हालांकि, यह अधिकार अपवाद स्वरूप होगा और इसके लिए ग्राम सभा की सर्वसम्मत मंजूरी अनिवार्य होगी।

इस नई नियमावली के जरिए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में विकास की दिशा और गति तय करने में अब ग्राम सभा की भूमिका निर्णायक होगी।