कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई नियमावली लागू, 60 दिनों में समाधान अनिवार्य

कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई नियमावली लागू, 60 दिनों में समाधान अनिवार्य

कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई नियमावली लागू, 60 दिनों में समाधान अनिवार्य
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Mar 23, 2026, 3:03:00 PM

झारखंड सरकार ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा ‘झारखंड सरकारी सेवक शिकायत नियमावली, 2026’ अधिसूचित कर दी गई है, जिसके साथ ही यह व्यवस्था पूरे राज्य में प्रभावी हो गई है। इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों को एक संगठित और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली उपलब्ध कराना है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य के कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों तरह के कर्मी अपनी सेवा या सेवांत लाभ से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शिकायत का निपटारा अधिकतम 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। इसके लिए हर विभाग और जिले में अलग-अलग सेवा शिकायत निवारण पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो प्राप्त आवेदनों की सुनवाई कर निर्णय देंगे और इसकी जानकारी संबंधित कर्मचारी को उपलब्ध कराएंगे।

विभागीय स्तर पर उप सचिव या उससे उच्च पद के अधिकारी तथा जिला स्तर पर स्थापना शाखा के वरिष्ठ प्रभारी या अनुमंडल पदाधिकारी से ऊपर के अधिकारी इस जिम्मेदारी को निभा सकेंगे। शिकायत प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए आवेदन लिखित रूप में देना होगा, जिसमें संबंधित दस्तावेज और शिकायत से जुड़े विभाग या अधिकारी का विवरण शामिल रहेगा।

इस नियमावली के दायरे में नियुक्ति, सेवा पुष्टि, वेतन और वेतनवृद्धि, पदोन्नति, एसीपी/एमएसीपी, वरिष्ठता निर्धारण, अवकाश स्वीकृति और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और भविष्य निधि से जुड़े सभी मामले शामिल किए गए हैं। किसी कर्मचारी के निधन की स्थिति में उसके आश्रित भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

प्रक्रिया के तहत आवेदन मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। यदि शिकायत किसी अन्य विभाग या जिले से संबंधित पाई जाती है, तो उसे वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा और आवेदक को इसकी सूचना दी जाएगी।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की उपस्थिति हर बार अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन संबंधित अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। जिला स्तर के मामलों का निपटारा जिला स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि उच्च स्तर के मामलों को विभागीय स्तर पर देखा जाएगा। साथ ही, इस प्रणाली में अपील का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।