15 लाख का इनामी नक्सली सहदेव महतो मुठभेड़ में ढेर, चाईबासा जेल ब्रेक का था मास्टरमाइंड

15 लाख का इनामी नक्सली सहदेव महतो मुठभेड़ में ढेर, चाईबासा जेल ब्रेक का था मास्टरमाइंड

15 लाख का इनामी नक्सली सहदेव महतो मुठभेड़ में ढेर, चाईबासा जेल ब्रेक का था मास्टरमाइंड
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 18, 2026, 1:13:00 PM

झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी क्षेत्र स्थित बटुका जंगल में शुक्रवार को सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली। पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई तीखी मुठभेड़ में प्रतिबंधित माओवादी संगठन के रिजनल कमेटी सदस्य सहदेव महतो उर्फ सुभाष उर्फ अनुज को मार गिराया गया। इस कार्रवाई में उसकी पत्नी नताशा समेत दो अन्य उग्रवादी भी ढेर हुए। सहदेव महतो लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

जेल ब्रेक की सनसनीखेज साजिश से बना कुख्यात

सहदेव महतो का नाम पहली बार वर्ष 2008 में सामने आया था, जब उसे गिरफ्तार कर चाईबासा जेल भेजा गया था। लेकिन दिसंबर 2014 में उसने जेल से फरार होने की बड़ी साजिश रची। इस दौरान कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया और करीब 15 बंदी भागने में सफल रहे। फरार कैदियों में सहदेव और जॉनसन उर्फ चंद्र गंझू प्रमुख थे। इस घटना के दौरान पुलिस की कार्रवाई में सहदेव के दो भाइयों की मौत भी हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे।

किशोर उम्र से ही नक्सल गतिविधियों में सक्रिय

केरेडारी प्रखंड के कुठान गांव निवासी सहदेव महतो ने बहुत कम उम्र में ही उग्रवाद का रास्ता चुन लिया था। वर्ष 1998 में, जब उसकी उम्र महज 14 वर्ष थी, तब वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। शुरुआती दौर में उसने सांस्कृतिक टीम के सदस्य के रूप में काम किया, जहां गीत और कार्यक्रमों के माध्यम से संगठन का प्रचार-प्रसार करता था। बाद में उसकी सक्रियता को देखते हुए उसे चाईबासा इलाके में भेजा गया, जहां उसने संगठन में अपनी पकड़ मजबूत की।

महाराष्ट्र की महिला नक्सली से की थी शादी

जेल से फरार होने के बाद सहदेव ने संगठन में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ाया और रिजनल कमेटी सदस्य के पद तक पहुंच गया। करीब तीन साल पहले उसने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र की रहने वाली नताशा से विवाह किया था। नताशा खुद भी संगठन की सबजोनल कमेटी सदस्य थी और उस पर 17 आपराधिक मामले दर्ज थे।

परिवार से दूरी, जंगल में सक्रियता

स्थानीय लोगों के मुताबिक, संगठन में शामिल होने के बाद सहदेव केवल दो बार ही अपने घर लौटा था। उसके पिता और बड़े भाई का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में अब उसकी भाभी और उनकी दो बेटियां ही बची हैं। सहदेव ने अपने परिजनों से लगभग संबंध तोड़ लिए थे और कभी आर्थिक मदद भी नहीं की।