नक्सल मोर्चे पर रणनीतिक बदलाव; CAPF कंपनियों का होगा पुनर्विन्यास, संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी तैनाती
नक्सल मोर्चे पर रणनीतिक बदलाव; CAPF कंपनियों का होगा पुनर्विन्यास, संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी तैनाती
झारखंड सरकार ने राज्य में बदलते सुरक्षा परिदृश्य और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती की नई रूपरेखा तैयार की है। इस फैसले के तहत उन जिलों में, जहां सुरक्षा स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की मौजूदगी घटाई जाएगी, जबकि अधिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार गढ़वा, गिरिडीह, खूंटी, लोहरदगा और सरायकेला-खरसावां को सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इन जिलों में सुरक्षा हालात पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं, जिसके चलते यहां केंद्रीय बलों पर निर्भरता कम की जा सकती है। इन क्षेत्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अब मुख्य रूप से राज्य पुलिस और उसके सशस्त्र इकाइयों के पास होगी।
दूसरी ओर, जिन केंद्रीय बलों की कंपनियां इन जिलों से हटाई जाएंगी, उन्हें चाईबासा, चतरा, लातेहार और बोकारो जैसे संवेदनशील जिलों में भेजा जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक इन इलाकों में नक्सल गतिविधियों और अभियान संबंधी चुनौतियों के कारण अतिरिक्त बलों की आवश्यकता बनी हुई है।
सरकार की योजना के तहत केंद्रीय बलों द्वारा खाली किए जाने वाले कैंप, पोस्ट और पिकेटों में राज्य की विभिन्न सशस्त्र इकाइयों को तैनात किया जाएगा। इसमें झारखंड आर्म्ड पुलिस (JAP), इंडिया रिजर्व बटालियन (IRB), स्पेशल आर्म्ड पुलिस (SAP) और स्टेट इंडिया रिजर्व बटालियन (SIRB) जैसी इकाइयों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र की निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक नियंत्रण भी मजबूत होगा।
इस व्यापक पुनर्व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया है। समिति को सुरक्षा संसाधनों के पुनर्वितरण, संवेदनशील क्षेत्रों की जरूरतों के आकलन तथा राज्य बलों की तैनाती से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान क्षमता को और मजबूत करना है।