नगर निकाय चुनावों में आरक्षण तय करने को लेकर राज्य सरकार की नीति के खिलाफ दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी और उससे पहले प्रतिशपथपत्र दाखिल करना अनिवार्य होगा।
अदालत ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद कोई जवाब पेश नहीं किया गया। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए सुनवाई की अगली तारीख निर्धारित की।
यह मामला रांची और धनबाद नगर निगम में महापौर पद के आरक्षण से जुड़ा है। राज्य सरकार ने रांची नगर निगम में महापौर पद को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया है, जबकि धनबाद नगर निगम में इस पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित न कर सामान्य श्रेणी में रखा गया है। इसी निर्णय को याचिकाकर्ता शांतनु कुमार चंद्र उर्फ बबलू पासवान ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बिनोद सिंह ने दलील दी कि नगर निगम क्षेत्रों में आरक्षण का निर्धारण संबंधित जाति की जनसंख्या के अनुपात में किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि रांची नगर निगम क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की आबादी अधिक होने के कारण वहां महापौर पद का आरक्षण उचित है, लेकिन धनबाद नगर निगम में अनुसूचित जाति की जनसंख्या अधिक होने के बावजूद महापौर पद को सामान्य श्रेणी में रखना तर्कसंगत नहीं है। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी, जब राज्य सरकार को अपनी नीति पर अदालत के समक्ष जवाब देना होगा।