मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के मामले में भैरव सिंह को राहत, अदालत ने किया दोषमुक्त

मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के मामले में भैरव सिंह को राहत, अदालत ने किया दोषमुक्त

मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के मामले में भैरव सिंह को राहत, अदालत ने किया दोषमुक्त
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 10, 2026, 2:05:00 PM

रांची की एक अदालत ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को रोकने से जुड़े चर्चित मामले में हिंदुत्ववादी नेता भैरव सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला अपर न्याययुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने सुनाया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद भैरव सिंह को दोषमुक्त घोषित किया।

यह मामला 4 जनवरी 2021 का है, जब रांची के किशोरगंज चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का काफिला प्रदर्शनकारियों के बीच फंस गया था। घटना के बाद सुखदेवनगर थाना में भैरव सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ दिनों बाद, 7 जनवरी 2021 को भैरव सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

दरअसल, उस समय ओरमांझी क्षेत्र में एक युवती की नृशंस हत्या को लेकर व्यापक जनाक्रोश था। 4 जनवरी की शाम इसी घटना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान जब मुख्यमंत्री का काफिला किशोरगंज चौक से गुजर रहा था, तब वहां मौजूद लोगों ने काफिले को रोककर विरोध जताया और हंगामा किया था। इसी घटनाक्रम के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

पृष्ठभूमि में जिस हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था, वह 3 जनवरी 2021 को सामने आई थी। ओरमांझी के जंगल से एक युवती का सिरविहीन शव बरामद हुआ था। शव की पहचान और हत्यारों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इस घटना को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी थी और पुलिस लगातार युवती के कटे हुए सिर की तलाश कर रही थी।

लगभग नौ दिनों की खोजबीन के बाद पुलिस को घटनास्थल से करीब 12 किलोमीटर दूर चंदवे गांव से युवती का सिर मिला। इसके बाद मृतका की पहचान सूफिया परवीन के रूप में हुई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने सूफिया के पहले पति शेख बेलाल और उसकी दूसरी पत्नी अफसाना खातून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास से भी कठोर सजा सुनाई। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों दोषी अपने जीवन की अंतिम सांस तक जेल में ही रहेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने के मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण भैरव सिंह को अदालत से राहत मिल गई है।