BREAKING : मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला गिरफ्तार, सारंडा में कई नक्सलियों ने छोड़ा संगठन

BREAKING : मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला गिरफ्तार, सारंडा में कई नक्सलियों ने छोड़ा संगठन

BREAKING : मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला गिरफ्तार, सारंडा में कई नक्सलियों ने छोड़ा संगठन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 13, 2026, 12:50:00 PM

झारखंड में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को दो अहम सफलताएं मिली हैं। एक ओर लंबे समय से वांछित महिला माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में पुलिस दबाव बढ़ने के बाद कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा विश्वास को मंगलवार को कोलकाता के उत्तर काशीपुर इलाके में स्थित एक गुप्त ठिकाने से हिरासत में लिया गया। वह पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के चकदह क्षेत्र की निवासी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि बेला लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में शामिल थी और झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के उग्रवादी नेटवर्क के बीच संपर्क स्थापित करने का काम कर रही थी।

झारखंड पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ राज्य के अलग-अलग थानों में करीब 23 मामले दर्ज हैं। उस पर 15 लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां उससे संगठन की गतिविधियों, संपर्क सूत्रों और संचालन तंत्र से जुड़ी जानकारियां जुटाने में लगी हैं।

उधर, पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियान के दौरान भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मंकी फॉरेस्ट इलाके में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और घेराबंदी के बीच कई नक्सली संगठन छोड़कर पुलिस की शरण में पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि घिरे हुए उग्रवादियों में से 15 ने आत्मसमर्पण किया है।

आत्मसमर्पण करने वालों में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी और 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर अश्विन भी शामिल है। इसके अलावा चंदन लोहरा, सोहन पुनेई उर्फ रंगा, माधई पात्रा, रजनी मुदगम और सलोनी मुंडा उर्फ पारूल जैसे कई सक्रिय सदस्य भी पुलिस के सामने आए हैं। इनमें कुछ पर लाखों रुपये के इनाम घोषित थे।

सूत्रों का कहना है कि सब-जोनल कमांडर माधई पात्रा लंबे समय से बीमार था और उसने मुख्यधारा में लौटने के उद्देश्य से आत्मसमर्पण का फैसला लिया। यह भी बताया जा रहा है कि उसने संगठन के वरिष्ठ नेता मिसिर बेसरा की सहमति के बाद यह कदम उठाया।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले पर आधिकारिक तौर पर सीमित प्रतिक्रिया दी है। माना जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां आगे और बड़े अभियान चला सकती हैं।