दुष्कर्म साजिश केस में आरोपी ओली विश्वकर्मा को बड़ा झटका, रिम्स ने निरस्त किया नामांकन

दुष्कर्म साजिश केस में आरोपी ओली विश्वकर्मा को बड़ा झटका, रिम्स ने निरस्त किया नामांकन

दुष्कर्म साजिश केस में आरोपी ओली विश्वकर्मा को बड़ा झटका, रिम्स ने निरस्त किया नामांकन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 30, 2026, 11:54:00 AM

रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ने मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन (एमएचए) की छात्रा ओली विश्वकर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसका नामांकन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। संस्थान का यह निर्णय जाति प्रमाणपत्र से जुड़े फर्जीवाड़े के पुष्ट होने के बाद लिया गया है। उल्लेखनीय है कि संबंधित छात्रा पहले से ही एक गंभीर आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में है।

रिम्स प्रशासन के अनुसार, प्रवेश के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में अनियमितता की आशंका पर रामगढ़ जिला प्रशासन से सत्यापन कराया गया था। इसके लिए उपायुक्त की ओर से गठित विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि छात्रा द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी का जो प्रमाणपत्र जमा किया गया था, वह वैध नहीं है। समिति ने पाया कि आरक्षण का लाभ पाने के उद्देश्य से गलत तरीके से प्रमाणपत्र तैयार कराया गया था। इस निष्कर्ष के आधार पर संस्थान ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नामांकन रद्द कर दिया।

गंभीर आपराधिक आरोपों में पहले से जेल में बंद
ओली विश्वकर्मा का नाम हाल ही में सामने आए एक आपराधिक प्रकरण के कारण भी सुर्खियों में रहा है। आरोप है कि 9 अप्रैल को उसने जन्मदिन का बहाना बनाकर डेंटल सर्जरी की एक छात्रा को अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां कथित तौर पर केक में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़िता को अचेत कर दिया गया। इसके बाद उसके सहयोगी मोहम्मद दानिश द्वारा दुष्कर्म किए जाने का आरोप है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस मामले ने संस्थान के भीतर भी व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की, जिसके बाद आरोपी छात्रा के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी।

रिम्स प्रबंधन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश लेने के मामले को गंभीर उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय लिया गया है। साथ ही, संस्थान ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।