मुंबई में NIA की बड़ी कार्रवाई, मगध जोन का फरार माओवादी चंदन कुमार गिरफ्तार

मुंबई में NIA की बड़ी कार्रवाई, मगध जोन का फरार माओवादी चंदन कुमार गिरफ्तार

मुंबई में NIA की बड़ी कार्रवाई, मगध जोन का फरार माओवादी चंदन कुमार गिरफ्तार
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 16, 2026, 1:43:00 PM

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बिहार–झारखंड क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे कुख्यात माओवादी नेता चंदन कुमार को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि यह गिरफ्तारी 2021 में दर्ज CPI (माओवादी) के मगध षड्यंत्र मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता है।

NIA के अनुसार, चंदन कुमार वर्ष 2021 से लगातार फरार था। वह बिहार के जहानाबाद जिले का रहने वाला है और प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) में सक्रिय भूमिका निभा चुका है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि वह संगठन की आर्थिक व्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ था और नक्सली गतिविधियों के लिए फंड जुटाने व उसे आगे पहुंचाने में अहम कड़ी बना हुआ था।

अदालत पहले ही कर चुकी थी भगोड़ा घोषित
इस मामले में NIA की विशेष अदालत ने चंदन को पहले ही भगोड़ा घोषित कर रखा था। दिसंबर 2021 में दर्ज इस केस (RC-05/2021/NIA/Ranchi) में प्रद्युम्न शर्मा, सुनील भगत, अभय मांझी उर्फ गुड्डू और बिट्टू उर्फ योजनंद्र पासवान समेत कई अन्य माओवादी नेताओं के नाम भी शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि यह पूरा षड्यंत्र मगध क्षेत्र में माओवादी संगठन को दोबारा खड़ा करने और उसके प्रभाव को फैलाने के उद्देश्य से रचा गया था।

जांच के दौरान NIA को पता चला कि चंदन मगध जोनल कमेटी के माध्यम से संगठन के पुनर्गठन की योजना में शामिल था। उसकी गतिविधियों में हथियारों का संग्रह व निर्माण, उनका वितरण और स्थानीय नेटवर्क को फिर से सक्रिय करना शामिल था।

एजेंसी के मुताबिक, वह सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए मजदूर बनकर अलग-अलग जगहों पर छिपता रहा। इस दौरान वह ग्रामीण इलाकों में मौजूद अपने ग्राउंड वर्कर्स के जरिए संगठन को निर्देश देता था। ये लोग लेवी वसूली, नई भर्तियां और हथियारों की सप्लाई जैसे काम संभाल रहे थे।

माओवादी ढांचे को बड़ा झटका
NIA अधिकारियों का मानना है कि चंदन कुमार की गिरफ्तारी से बिहार और झारखंड में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचा है। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी, जिससे मगध जोन में माओवादियों की पूरी संरचना को उजागर करने में मदद मिलेगी।